
5 साल तक हाथरस की राजनीति के केंद्र रहे पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय का निधन
पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय का शुक्रवार की देर रात आगरा में निधन हो गया। वह करीब एक साल से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर आते ही उनके समर्थकों में मातम छा गया।
हाथरस। पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय का शुक्रवार की देर रात आगरा में निधन हो गया। वह करीब एक साल से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर आते ही उनके समर्थकों में मातम छा गया। रामवीर उपाध्याय पुत्र रामचरन उपाध्याय मूल रुप से मुरसान क्षेत्र के गांव बामोली के रहने वाले थे। रामवीर उपाध्याय का शव सुबह हाथरस आ सकता है। रामवीर के निधन की खबर के बाद पूरे जिले में उनके समर्थकों में मातम छाया हुआ है। चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है। रामवीर के निजी सचिव रानू पंडित का कहना है कि पूर्व ऊर्जा मंत्री का आगरा में निधन हुआ है।
25 साल तक हाथरस की राजनीति के केंद्र रहे रामवीर
रामवीर पिछले 25 साल से लगातार हाथरस की राजनीति के केंद्र रहे। रामवीर उपाध्याय 1993 में गाजियाबाद से वकालत छोड़कर हाथरस की राजनीति में आ गये। वह पहला चुनाव निदर्लीय लड़े और हार गये,लेकिन उसके बाद सन 1996 में वह बसपा से हाथरस विधानसभा से विधायक बने। बसपा की सरकार बनी तो वह पहली बार में ही कैबिनेट मंत्री बने और परिवहन विभाग जैसा मंत्रालय मिला। 1997 में उन्होंने हाथरस को बसपा सुप्रीमो मायावती से कहकर जिला बनवा दिया। उसके बाद 2002 में रामवीर फिर से हाथरस विधानसभा से चुनाव लड़े और रालोद प्रत्याशी देवस्वरुप शर्मा को हरा दिया। फिर बसपा सरकार में परिवहन और ऊर्जा जैसे दो महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली।
तीसरी बार रामवीर फिर बसपा से ही मैदान में उतरे और फिर रालोद प्रत्याशी देवेन्द्र अग्रवाल को हराकर विधानसभा पहुंच गये। फिर तीसरी बार कैबिनेट मंत्री बने और ऊर्जा मंत्रालय मिला। 2012 में हाथरस विधानसभा सीट सुरक्षित होने के कारण वह सिकंदराराऊ विधानसभा पहुंच गये। वहां बसपा का कोर वोटर न होने के बाद भी उन्होंने यशपाल सिंह चौहान को करीब एक हजार वोट से हरा दिया। पांच साल तक विधायक रहने के बाद रामवीर ने सादाबाद विधानसभा को अपनी राजनीति के लिये चुन लिया और 2017 में वह फिर सादाबाद से बसपा के उम्मीदवार बने और सपा प्रत्याशी देवेन्द्र अग्रवाल को हराया।
पत्नी को पहले जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया,फिर सांसद
रामवीर उपाध्याय ने वर्ष 2005 में अपनी पत्नी सीमा उपाध्याय को राजनीति में उतार दिया। सबसे पहले उन्हें हाथरस का जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया। उसके बाद सीमा 2009 में फिर जिला पंचायत अध्यक्ष बनी और उसी दौरान लोकसभा चुनाव आये तो उन्होंने सीमा को आगरा की फतेहपुर सीकरी विधानसभा से चुनावी मैदान में उतारा। सीमा ने सिने अभिनेता राजब्बर को हरा दिया और संसद पहुंच गईं।
भाईयों को रामवीर ने बनाया कामयाब
रामवीर ने खुद ही सियासत में डंका नहीं बजाया बल्कि अपने भाईयों को राजनीति में कामयाब बना दिया। सबसे पहले अपने छोटे भाई मुकुल को वर्ष 2004 के उप चुनाव में अलीगढ़ की इगलास विधानसभा से विधायक बनवाया। बाद में बसपा सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा दिलवाया। विधायक का कार्यकाल खत्म होने के बाद एमएलसी बनवाया। अपने छोटे भाई रामेश्वर को तीन बार ब्लॉक प्रमुख बनवाया। एक छोटे भाई विनोद उपाध्याय को सादाबाद और डिबाई विधानसभा से चुनाव लड़वाया,लेकिन जब भाई जीत नहीं सका तो उसे जिला पंचायत अध्यक्ष बनवा दिया। आज भी रामवीर की पत्नी सीमा उपाध्याय हाथरस की जिला पंचायत अध्यक्ष है।
जुलाई 2021 से बिगड़ी रामवीर की हालत
जुलाई 2021 में रामवीर उपाध्याय ने अपनी पत्नी सीमा उपाध्याय को जिला पंचायत अध्यक्ष के लिये मैदान में उतारा। जिस दिन मतदान हो रहा था। उसी वक्त रामवीर की तवियत बिगड़ गईऔर उसके बाद वह हाथरस की राजनीति में सक्रिय नहीं हो सके। लगातार एक साल से वह किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। शुक्रवार की देर रात उन्होंने आगरा के रेनवों हॉस्पीटल में अंतिम सांस ली।
25 साल में पहली बार खाई शिकस्त
1997 से लेकर अब तक रामवीर को राजनीति में कोई शिकस्त नहीं दे सका। इस बार बीमारी की हालत में उन्होंने भाजपा की सदस्यता अपने आगरा आवास पर ही ली। पार्टी ने उन्हें सादाबाद से मैदान में उतार दिया,लेकिन बीमार होने के कारण वह प्रचार नहीं कर सके। वह केवल एक दिन गाड़ी में थोड़ी देर के लिये रोड शो में आये। इसलिए 2022 का चुनाव वह हार गये।