काश वो होते….. कल्याण!!

1990 की राजनीति के गलियारे से होकर आगे चले तो शायद हम एक ऐसे शख्स को बेहतर समझ सकते है जिस व्यक्ति नें अपनी जिंदगी राजनीति से ज्यादा राष्ट्र और चरितार्थ को महत्वपूर्ण माना हों। वर्ष 1990 में संघ और बीजेपी सत्ता में आने के लिए हाथ पैर मार चला रहें थे और तलाश थी एक ऐसे पारस की जिसके छूने से इतिहास लिखा जा सकें।तभी भारत के लाल अटल बिहारी बाजपेई की नजर अलीगढ के छोटे से क्षेत्रीय नेता कल्याण सिंह पर पड़ी, जब अटल और कल्याण की मुलाक़ात हुई थी तब तक 1967 में कल्याण विधानसभा जा चुके थे। कल्याण सिंह भारतीय जन संघ और जनता दल में उभरते नेता बन चुके थे।अटल के बारे में कहा जाता है कि जिस चीज को दूरबीन नहीं देख पाती थी उसे अटल देख लिया करतें थे और हुआ भी वही कल्याण और अटल की मुलाक़ात नें भारत में समय की गोद से इतिहास की परिणीति लिखी। 1991 में विधानसभा चुनाव हुए और संघ की मेहनत रंग लाई और बीजेपी बचपन से सीधे जवान 221 सीटों को जीत कर हुई थी।उस समय उत्तराखंड का हिस्सा भी उत्तर प्रदेश हुआ करता था।लेकिन RSS नें इस जवानी को भुनाने के लिए कल्याण की जवानी को दांव पर लगाना उचित समझा… जो 6 दिसम्बर 1992 को देश में हुआ सभी को पता है….
लेकिन कल्याण नें जब तक समझा तब तक उपजाऊ भूमि हाथ से निकल चुकी थी,परंतु भारत का कोना-कोना समझ गया था कि कल्याण निश्चित ही बिष्णु के अवतार है क्योंकि इतना बड़ा सामर्थ साधारण व्यक्ति में नहीं हों सकता था और भारत के हर हिस्से में बतौर कल्याण सिंह को आवभगत के लिए बुलावे आनें शुरू हों चुके थे। भारत में एक ऐसा दौर भी आया था कि दक्षिण भारत में कल्याण सिंह को #बिष्णु अवतार के तौर पर मठाधीशो से ऊपर माना गया था। यही से भारत की कुरीतियों नें भारत से कल्याण को खोना शुरू कर दिया था। लेकिन सत्ता को लात मार देने से ही कल्याण सिंह ”बाबू जी,, हों चुके थे, अब भारत के एक से एक बड़े नेता को सिर्फ अगर भगवान के बाद डर लगता था तो वो थे कल्याण सिंह क्योकि भारत की जनता नें ”बाबू जी,, में भावी प्रधानमंत्री के चेहरे को देखना शुरू कर दिया था।
वर्ष 1992 की परिणीति के बाद जो चुनाव हुए उस चुनाव में RSS नें अपने पैर खींच लिए और उत्तर प्रदेश में बीजेपी चुनाव से बाहर हों गई। #कल्याण सिंह तब यह जान गये थे कि RSS उन्हें पचा नहीं रही है, RSS खुद को डुबो कर कल्याण के राजनैतिक सफर को ख़त्म करने की ठान चुकी थी।तब के राजनैतिक जानकार यह मान बैठे थे कि भविष्य में कल्याण सिंह ही RSS और बीजेपी होंगे। जो वर्तमान की परिस्थिति में नरेंद्र मोदी के दौर में देखने को मिल भी रहा है…….
RSS नें बाबू जी के लिए सोचा तो कल्याण नें भी बाबू जी बनने की ठान लीं थी और #बीड़ा उठा कर 14 वर्ष करीब बीजेपी को भी जैसे को तैसा ही जवाब दिया था। जब RSS खुद को डुबो कर कल्याण सिंह को ख़त्म कर सकती है तो फिर बाबू जी तो उससे ऊपर हों चुके थे….. बाबू जी नें खुद को डुबो कर बीजेपी को करीब 14 वर्ष तक नमक डाल कर जमीन में दफ़न करके रखा था।
ऐसे ही नहीं कहा गया था कि कल्याण सिंह बिष्णु अवतार थे। मरे हुए को जिन्दा करने का हुनर रखते थे बाबू जी….14 वर्ष बाद 2014 में केंद्र और उत्तर प्रदेश के समीकरण बदल कर बीजेपी को सत्ता दिला कर जिन्दा कर गये….. ऐसे थे बाबू जी।
जिद….. ऐसी की सूरज भी झुक जाये
कल्याण सिंह नें सपने देखें लेकिन सम्मान से कभी समझौता नहीं किया था। चापलूसी उनके पैरों में भी नहीं थी.. सिर तो बहुत दूर था।
2013 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात से उत्तर प्रदेश को देख रहें थे। उस समय सबसे बड़ा संकट था कि कल्याण को कौन मनाएगा… नरेंद्र मोदी के सबसे दिलअजीज दोस्त अमित शाह नें यह जिम्मेदारी लीं और जनवरी 2013 में अमित शाह मिलने पहुँच गये बाबू जी से उनके घर……..
कल्याण सिंह बाबू जी के बेहद करीबी बताते है कि #जमीन पर बैठ कर #अमित शाह नें बाबू जी से कहा था कि बाबू जी 2014 के आम चुनाव आने वाले है नरेंद्र भाई मोदी नें आपसे जानने के लिए भेजा है कि बाबू जी से पूछो कि नरेंद्र भाई मोदी चुनाव में आये या नहीं!!!…
कल्याण सिंह नें अगर किसी के लिए जिद को त्यागा तो वो थे अमित शाह और नरेंद्र मोदी क्योंकि नरेंद्र मोदी में कल्याण सिंह बाबू जी अपने जैसा पुरुषार्थ देखा करतें है। एक बार खुले मंच से बाबू जी नें कहा भी था कि जो मैं नहीं कर सका वो नरेन्द्र मोदी करेंगे। आज बाबू नहीं है!!लेकिन उनके सपनों को साकार कर रहें नरेंद्र मोदी….।
यें थे उत्तर प्रदेश के बाबू जी…..
प्यार से मांगो तो अपने हिस्से की भी पूरी दुनिया लुटा दें और जिद कर जाये तो बच्चे की तरह सूरज को निगल लें….. भारत को अब नहीं मिलेंगे बाबू जी
बाबू जी का 21 अगस्त 2021 को स्वर्गवास हों गया लेकिन सम्मान की राजनीति का अद्भुत समावेश अपने पीछे छोड़ गये। आज उनकी पुण्यतिथि है नमन करतें है पुरुषार्थ पुरुष को….
उक्त लेख व्यक्तिगत अनुभव और अपने पिता की प्रेरणा से लिखा है