(अक्षय तृतीया-3 मई मंगलवार)
【इस दिन किये गए दान या सद्कर्म का फल अक्षय होता है】

– आज ही के दिन माँ गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था ।
भगवान परशुराम का अवतार आज ही के दिन हुआ था ।
-माँ अन्नपूर्णा का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था
-द्रोपदी को चीरहरण से कृष्ण ने आज ही के दिन बचाया था ।
– कृष्ण और सुदामा का मिलन आज ही के दिन हुआ था ।
– कुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था ।
-सतयुग और त्रेता युग का प्रारम्भ आज ही के दिन हुआ था ।
-ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण भी आज ही के दिन हुआ था ।
– प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री बद्री नारायण जी का कपाट आज ही के दिन खोला जाता है ।
बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में साल में केवल आज ही के दिन श्री विग्रह चरण के दर्शन होते है।
इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था ।
अक्षय तृतीया अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त है कोई भी शुभ कार्य का प्रारम्भ किया जा सकता है
*अक्षय तृतीया के दिन किये हुए दान का कभी क्षय नही होता हैं इस दिन वृंदावन मतलब ब्रज में किये हुए दान का अक्षय महत्व होता हैं जैसे की शीतल वस्तुओं का दान का विशेष महत्व होता हैं जो प्रकृति द्वारा श्री ठाकुर जी को शीतलता प्रधान करती हैं जैसे की मीठे जल की सेवा शर्बत सेवा ठंडाई सेवा चंदन सेवा आदि सेवा करने या आपने ही स्थान से करवाने हेतुं संपर्क कर सकते हैं