करौली दंगा! पुलिस के सामने दंगाइयों को ऑर्डर दे रहा था पार्षद, छतों पर छुपे बैठे थे उपद्रवी, जबकि DGP बोले- लाउडस्पीकर की इजाजत नहीं थी, फिर भी बजा, नारेबाजी भी हुई, कई सवालों के नही दे सके जवाब

करौली दंगो पर डीजीपी एमएल लाठर ने दंगों के सबंध में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि रैली पर एकाएक करीब 150 लोगों ने हमला किया था. आसपास के मकानों से लोग लाठी-डंडे लेकर रैली पर टूट पड़े. इसमें 11 स्थानीय लोग और 8 पुलिसकर्मी घायल हो गए.
डीजीपी ने बताया कि रैली निकालने की स्वीकृति दी गई थी. उसमें साफ लिखा था- लाउड स्पीकर बजाकर रैली नहीं निकाली जाएगी. इसके बाद भी लाउड स्पीकर बजाकर रैली निकाली गई. रैली निकालने के दौरान नारेबाजी की गई. इस दौरान पुलिस जाप्ते और रैली में चल रहे लोगों पर छतों से पथराव शुरू हो गए. साथ ही आसपास के मकानों से करीब 100 से 150 लोग लाठी व डंडा लेकर हमला कर दिया.
उन्होंने बताया कि पुलिस अब तक 10 एफआईआर दर्ज कर चुकी है. इसमें एक कोतवाली थानाधिकारी और 9 अन्य लोगों के द्वारा दी गई है. पुलिस ने अब तक 23 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है. साथ ही जांच के दौरान 44 उपद्रवी चिन्हित किए गए हैं. डीजीपी एमएल लाठर ने बताया तोड़फोड़ और आगजनी की घटना से दोनों पक्षों के करीब 80 से अधिक व्यक्तियों की संपत्ति को नुकसान हुआ है. नुकसान का आंकलन कर राज्य सरकार को भेज कर मुआवजा देने की कार्यवाही की जाएगी.
घटना को 7 दिन होने के बाद भी डीजीपी राजस्थान के पास कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं हैं. रैली के दौरान बाइकों और मकानों में आग किसने लगाई सवाल पर डीजीपी ने कहा अनुसंधान चल रहा है. उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोबारा से प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. हालांकि इस मामले की जांच अब एसीएस होम के सुपरविजन में होगी.
वहीं करौली में एक पार्षद के इशारे पर तमाशबीन पुलिस के सामने नकाबपोश दंगाई शहर को आग के हवाले करते रहे. पार्षद आगे-आगे चल रहा था और पीछे नकाबपोश हाथ में लाठियां लेकर तोड़फोड़ कर रहे थे, दुकानों में आग लगा रहे थे. वार्ड 33 के पार्षद मतलूब अहमद के इशारे पर हुए इन दंगों पर पुलिस भी चुप रही. नकाबपोश दंगाई पुलिस के सामने हाथों में लाठियां लेकर गुजरे, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हुई, उन्हें रोकने की. लोग पुलिस से मदद की गुहार लगा रहे थे- बहुत खून बह गया है, अस्पताल पहुंचा दीजिए, लेकिन पुलिस ने काफी देर तक कुछ नहीं किया. करौली दंगों को आज आठ दिन हो चुके हैं. लोग घरों में कैद हैं, लेकिन मुख्य आरोपी पार्षद अब भी गिरफ्त से दूर है.