धरातल से खिसकने लगा आखिरी चरण…. क्यूँ??

नौ जिलों की करीब 54 विधानसभा सीटों पर अभी तक के CONFERENCE NEWS के मतानुसार बड़े फेर बदल हों सकते है। लोकसभा बनारस की आठ विधानसभा सीटों पर पटेल कुछ सीटों पर बीजेपी को हराने के ही मूड से मुड़ चूका है। जिसे मोदी – योगी या फिर कहे कि प्रदेश का कोई भी नेता उसके मतदान को आखिरी चरण में बदल ही नहीं सकता है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव नें ओमप्रकाश राजभर और कृष्णा पटेल को सांझा सीटे देकर पूर्वांचल की काफ़ी सीटों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के साथ ही समाजवादी पार्टी के परम्परागत वोट को इन सीटों पर पटेल राजभर सयुक्त फेक्टर से बीजेपी कार्यकर्त्ता के सामने बूथ पर लड़ने के लायक बना दिया है।
बनारस की रोहनिया विधानसभा की बात करें तो नौसिखिया विधायक से नाराज होकर इस विधानसभा पर कृष्णा पटेल के प्रत्याशी को यह सीट जा सकती है!जबकि बीजेपी नें वर्तमान विधायक संतोष पटेल को हटा कर अन्य पटेल को टिकट देने के बाद भी स्थानीय जनता बीजेपी से नाराज ही लग रहीं है। एक तरफ इस सीट पर अनुप्रिया पटेल और उनकी माँ कृष्णा पटेल की लड़ाई बता कर सपा को वोट देना चाहते है तो कुछ मतदाता बीजेपी के वर्तमान विधायक से नाराज होकर वोट करने जा रहें है।
वही सेवापुरी विधानसभा की जनता के रुख रोहनिया विधानसभा की जनता से बिलकुल जुदा-जुदा हैं।जबकि कृष्णा पटेल और अनुप्रिया पटेल के प्रत्याशी ही इस सीट पर है। यहाँ की ग्रामीण जनता से जानकारी ली गई तो उनका कहना था कि मोदी और वर्तमान विधायक नें काफ़ी काम किए है।वर्तमान विधायक नील रतन पटेल नें 2017 विधानसभा चुनाव में करीव 54 हजार वोटों से जीत कर सत्ता में पहुँचे थे। सबाल यह नहीं कि कौन जीत हार रहा है…. सबाल यह जहन में है कि रोहनिया और सेवापुरी विधानसभाओं पर पटेल समाज अपने भरपूर कद में मौजूद है परन्तु एक दूसरे के बगल में लगी विधानसभाओं की जनता अपने अपने रुख और व्यक्तिगत अनुभव पर वोट करने जा रहीं है।
पिंगला विधानसभा के साथ सदर काशी में जमीन आसमान का अंतर देखने को मिला है जहाँ काशी में बाबा काशी कोरिडोर निर्माण होने से जो लोग बेघर हुए है। वही स्थानीय निवासी कहते है कि काशी सिर्फ मोदी नें बदला है और रोजगार के अवसर बढे है।लेकिन काशी शहर से बाहर ग्रामीण-गाँव में कुछ भी नहीं बदला है!मोदी और योगी चेहरा इन आठ विधानसभाओं पर क्या असर करता है। दस मार्च को देखना लाजबाब होगा।
इस समय जनता जोरशोर से मतदान कर रहीं। बूथ स्तर पर पुलिस प्रशासन व पैरा मिलिट्री की व्यवस्था होने से मतदान में किसी तरह का मतदाताओं में देखने को नहीं मिल रहा है।