जब से अपनी याददास्त सम्भाली है, लगभग तभी से भृष्टाचार और महँगाई का रोना सुनते आ रहे हैं…!!

जब से अपनी याददास्त सम्भाली है, लगभग तभी से भृष्टाचार और महँगाई का रोना सुनते आ रहे हैं…!!

भृष्टाचार के हालात तो ये हैं कि 80% लोग ईमानदार इस लिए हैं क्योंकि उनको माल कमाने का मौका नहीं मिला। यदि 50% लोग भी ईमानदारी से काम कर रहे होते तो पूरा सडकारी सिस्टम इतना सड़ नहीं गया होता, जहाँ सब मौके की तलाश में बैठे होते … !! मोदी जी ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का जो रास्ता अपनाया तो इससे बड़ी मात्रा में भ्रष्टाचार पे लगाम लगी परन्तु इसके बाद तो अधिकारी के साथ जनता का भी भयानक भृष्टाचारी चेहरा उजागर हो गया। गरीब का गैस सिलेण्डर हजम करने के लिए BPL के ऊपर के लोगों को जबरन हजार-1500/- देकर खुद भी भृष्टाचार के नाले में डुबकी लगाते देखा है। ऐसे में “सिस्टम में भृष्टाचार व्याप्त है”, कहने से पहले जनता के गिरेबान में भी झाँक लेना चाहिए… !!

अब आते हैं मंहगाई पर – सिर्फ प्याज टमाटर के लिए इसी जनता ने अटल जी की सरकार जप ली थी और 100 दिन में महगाई कम करने का वादा करके सरकार में आने वाली कांग्रेस ने पानी बोतलों में बिकवा दिया था। 35-40 वाला पेट्रोल 70 पे और डॉलर पहुँचा दिया था 80 पार। 80-90 वाली दाल बिक रही थी 250/- में और हर बजट से पहले जो जबर पुराने रेट पे आवश्यक वस्तुओं का भंडारण करके नए रेट पे बेंचने का खेल 6 महीने तक चलता था तो वो दुनियाँ का सबसे बड़ा जनता से धोखा और घोटाला था। सारे लघु उद्योग चीन को बेंच दिए गए थे, सेना हथियारों के लिए हमेशा जूझती रहती थी। भारत में ही बने सेना के जूते, इजराइल की कंपनी के माध्यम से इम्पोर्ट किये जाते थे ताकि कमीशन खाया जा सके। सरकारी बैंक में NPA की बाढ़ आ गयी थी। परमाणु पनडुब्बी किराए पे आने से पहले ही उसका डेटा लीक हो जाता था व वैज्ञानिकों की हत्या करवा दी जाती थी। हवाला रुट पाकिस्तान से होकर गुजरता था तो पाकिस्तानी आतंकी भी दमभर सर पे चढ़ के मूतते थे। हर वर्ष कोई न कोई बड़ा आतंकी हमला हो जाता था और सेना के सैनिकों के सर काट ले जाने वालों को आगरा बुला कर बिरयानी खिलाई जाती थी। कड़ी निंदा से ऊपर की कार्यवाही पे हवाला का हलाला हो सकता था तो सेना को बदला लेने की भी छूट नहीं थी और जिसने हिमाकत की उसका कोर्ट मार्शल निश्चित होता था। बाकी हिन्दू आतंकवाद के साथ हिन्दुओं पर दंगा रोधी बिल भी घुसेड़ने की तैयारी हो चुकी थी। कितने कलेक्टर बने उसकी बात तो छोंडो, ट्यूशन पढ़ाने के सिवा, नौजवानों के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। हिन्दुओं के हालात तो अपने घर में ही शरणार्थियों जैसे हो गए थे। तब भी जिसमें कुव्वत थी वो अपनी इज्जत बचाने के लिए 100 रास्ते खोज लेता था।

अब ये भी जान लो कि महगाई कब नहीं थी और कब नहीं होगी? एक जमाने में दिल्ली से कानपुर जाना एक प्रोजेक्ट होता था। आज चार-धाम पहाड़ों पर भी सभी मौसम में खुला रहने वाला 4लेंन का हाइवे खड़ा है साथ में रेलवे ट्रैक भी। दुनियाँ की सबसे बड़ी मूर्ती, दुनियाँ का सबसे बड़ा पुल, दुनियाँ की सबसे बड़ी सुरंग, दुनियाँ की सबसे ऊंची सड़क, एशिया का सबसे बड़ा स्टेडियम, सौरऊर्जा का केंद्र, योगदिवस, सेना के 100 आर्टिकल मेड इन इंडिया, देशी पोत/पनडुब्बी, देशी नेविगेशन सिस्टम, एन्टी सेटेलाइट, मंगलयान, 6th जेनेरेशन का स्वदेशी लडाकू विमान, किसान को सम्मान निधि, हर घर ट्वेलेट और जनधन खाता, एशिया का सबसे बड़ा मोबाइल एक्सपोर्ट, पहली स्वदेशी वैक्सीन, 5K रेंज की सुपर सोनिक मिसाइल, स्वदेशी क्रायोजनिक इंजन, स्वदेशी स्वाति रडार, सेना को बुलेटप्रूफ जैकेट्स, मजदूर को पेंशन व PF एकाउंट, आतंकवाद पे पूरा नियन्त्रण, दुनियाँ में देश का मान सम्मान, पेंडेमिक में देश भर के BPL को मुफ्त राशन, मुद्रा योजना से व्यापार, रामायण सर्किट जैसे उपक्रम से धर्म संस्थापना के साथ पर्यटन, श्रीराम मंदिर और श्रीअयोध्या जी का कायाकल्प, सनातन की गूँज पूरी दुनियाँ में, टैक्सास से लेकर नैरोबी तक दीपावली मनाई जा रही है, टैक्स सिस्टम में अभूतपूर्व परिवर्तन, हर जिले में ऑक्सीजन प्लांट, देश में तीन रक्षा कॉरिडोर, लगभग 40 एम्स, केदारनाथ धाम का कायाकल्प, काशी कॉरिडोर, …
उप्लब्धियाँ लिखते-2 हाँथ दुख जाएगा परन्तु ये खत्म नहीं होंगी फिर भी वही तीन मुद्दों का रोना – हाय महगाई, हाय भृष्टाचार, हाय हमको कलेक्टर नहीं बनाया …!!
7 वर्षों में जो डिलीवर हुआ है क्या वो 70 वर्षों से ज्यादा नहीं है? आमदनी के स्रोत बढाये गए या नहीं? PMO से भृष्टाचार खत्म किया गया या नहीं? आलू का पिछवाड़ा पता नहीं है और किसान की डिग्री के साथ घर बैठे उस डिग्री की सैलरी चाहिए वो भी बिना कुछ किये तो तुम्हारे अच्छे दिन कभी नहीं आने वाले चाहे सत्ता स्वयम राजा रामचन्द्र की आ जाय तो भी।
कभी महगाई का रोना नहीं रोया। हमेशा बहस का विषय होता था – राष्ट्र गौरव, सनातन से दुर्व्यवहार, राष्ट्र की सीमाओं और धर्म की दुर्दशा, घोटालों के लिए धन्धे चीन को बेंच देना, दुनियाँ में भिखारी वाली इमेज, देश में कुछ ऐसा नहीं जिस पर गर्व कर सकें, लाशों की भी लाखों में वसूली, आतंकवाद पर कोई लगाम नहीं, हर तरफ बस लूट-मार…
देश का वेनेजुएला बनने में ज्यादा वक्त नहीं बचा था…
ऐसे गन्दे राजनैतिक माहौल में इतना सब मात्र 7 वर्षों में कर देने के बाद भी, वो भी 2 साल से कोविड की मारा मारी के बीच, जब ऐसे धर्माचारी, नैतिक और जनता का भला करने में दिन रात लगे शासकों पर भी अविश्वास जताने वाला हिन्दू मिल जाता है तो ऐसा लगता है कि जैसे ये विभीषण और जयचन्द का मिश्रण है.. !!

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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