
चिकित्सक के न होने पर इलाज को जाते हैं पड़ोसी जिले में
~राजा का रामपुर पीएचसी पर तैनात एक ही चिकित्सक की डयूटी अब कोविड हास्पिटल में स्वास्थ्यकर्मियों की भी कमी~
एटा: राजा का रामपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के दायरे में लगभग 23 हजार की आबादी आती है, लेकिन यहां पर सिर्फ एक ही चिकित्सक तैनात हैं। कोरोना संक्रमण काल में उनकी ड्यूटी कोविड अस्पताल में लगा दी गई। इस कारण वे केंद्र पर नहीं बैठ पा रहे। तमाम बीमार लोगों को पड़ोसी जनपद फर्रुखाबाद और मैनपुरी तक इलाज के लिए जाना पड़ता है। केंद्र पर स्वास्थ्यकर्मियों की भी कमी है।
इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से नगला माली, नगला तुलई, कनेसर, ताजपुर, तिगरा, भैसराना, नगला दलू, नगला गलू, रायपुर समेत दो दर्जन के लगभग गांव जुड़े हैं। कोरोना संक्रमण काल में होना यह चाहिए कि चिकित्सकों की उपलब्धता सरकारी अस्पतालों में जरूर रहे, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इन्हीं पर अधिक निर्भर हैं।
राजा का रामपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रभारी के रूप में डा. अनुज तैनात हैं। इन दिनों ओपीडी बंद है, लेकिन मरीज फिर भी पहुंचते हैं। जब चिकित्सक नहीं मिलते तो लौट जाते हैं। चिकित्सक की ड्यूटी बागवाला के कोविड एल-2 अस्पताल में है।
इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कर्मचारियों की भी कमी है। यहां सिर्फ एक फार्मासिस्ट, एक सफाईकर्मी, एक वार्ड ब्वॉय और एक एएनएम की तैनाती है। यहां मात्र चार बेड हैं। इस अस्पताल में कोई भर्ती नहीं होता, क्योंकि उचित देखभाल नहीं हो पाती। गिरासू है एएनएम सेंटर:
एएनएम सेंटर गिरासू स्थिति में है। सात साल पूर्व एएनएम सेंटर राजा का रामपुर में बनवाया गया था। इसका उद्देश्य यह था कि यहां एएनएम बैठेंगी, लेकिन देखरेख के अभाव में यहां घास उग आई है और गंदगी है। ऐसी स्थिति में एएनएम नहीं बैठती। वैसे भी इमारत इतनी जर्जर है कि कभी भी गिर सकती है। यह सेंटर आज तक आबाद नहीं हो पाया। काम कर रहा एक वैक्सीनेशन सेंटर:
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक वैक्सीनेशन सेंटर है जो काम कर रहा है। यहां टीके लगवाए जाते हैं, लेकिन वैक्सीनेशन की रफ्तार काफी धीमी है। शुक्रवार को जरूर कुछ लोग दिखाई दिए। यहां अब तक 1250 लोगों के वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इनमें 350 ऐसे लोगों के वैक्सीन लगाई गई जिन्होंने दूसरी डोज ली है।