भीड़ जमा करो और जमानत ले जाओ….सहाब ये बंगाल है

भीड़ जमा करो और जमानत ले जाओ….सहाब ये बंगाल है

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि सभी पर F.I.R.लिखो और गिरफ़्तार करो.. गिरफ़्तारी भी की गयी और कोर्ट तक लाया गया, यह पूरा मामला बंगाल के नारदा घोटाले मे कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा CBI को निर्देश जारी किया था कि उक्त सभी के खिलाफ़ प्रथम द्रस्ट्या मुकदमा लिखा जाना चाहिये और गहनता से जाच भी होनी चाहिए,

CBI ने नारदा घोटाले के सभी आरोपियो के खिलाफ़ जाच की और गिरफ़्तार कर कोर्ट मे दाखिल भी किया परंतु राजनीति मे एसा भी होता है कि भीड़ तय करती कि न्याय किस और जाना चाहिए TMC के सुव्रत मुखर्जी,चट्टोउपाध्याय,फ़िरहाद हाकिम,शोभन चट्रजी,मदन मित्रा.इस तरह से एक मन्त्री,दो विधायक,चार नेता शामिल रहे हैं,

बर्ष 2014 के स्ट्रिन्ग हिडन केमरे मे कैद हुये थे..

नारदा घोटाले का जिन्न 2014 मे मैथ्यु (पत्रकार)निकाल कर लाये थे और वर्ष 2017 मे कोर्ट पहुंचा था और अभी 7 मई को बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनगड द्वारा CBI को मंजूरी दी ग़ई थी,
यह वही जिन्न है जिससे BJP ने बंगाल मे अपने पैर पसारे थे और आज 2021 की रणनीति का हिस्सा बना कर रखा था…यह सही है कि बंगाल मे नंगानाच हो रहा है यह हम नही बंगाल के राज्यपाल का कहना है कि बंगाल मे कानून का राज नही है और वही आज CBI कार्यालय के सामने देखने को मिला,जिस मामले मे CBI को उम्मीद थी !!परंतु कोर्ट ने महज चंद लोगो की भीड़ देख कर अपने फ़ैसले मे सभी आरोपियो को 50-50 हजार के निजी मुचलके पर जमानत थमा दी थी,न्यायालय का पूरा न्याय सिस्टम चंद भीड़ के हाथो मे पत्थर देख कर माथे पर सिलबटे बना कर पूरे दिन पसीने को पोछता रहा व अन्त मे जमानत दे कर.. हाई कोर्ट के फ़ाले मे मामले को खिसका दिया.अब पुनः इस पुरे मामले के खिलाफ़ CBI कलकत्ता हाईकोर्ट मे अपना पक्ष रखने के लिये देर शाम तक कोर्ट मे मौजूद रही..

BJP मे शामिल हो जाये दुध से धुल जायेगे…

शुभेन्दु अधिकारी को मत भुल जाना क्यूकि यह भी उतने ही साझे के अपराधी है जितने आज के सभी आरोपी,

शुभेन्दु अधिकारी आज BJP की तरफ़ से बंगाल का नेतृत्व कर रहे हैं कभी ममता दीदी के सबसे चहेते और करीवी हुआ करते थे किंतु आज BJP के विधायक है व ममता दीदी को पटखनी देकर अमित शाह के करीवी हो गये हैं,

खेला होबे….. ममता बोले है

देर शाम को खेला बदल गया और कलकत्ता हाईकोर्ट ने सभी आरोपियो को बुधवार तक जेल भेज दिया… कहानी यही से शुरु होती है और बंगाल का आने वाला भाग्य भी तय होगा, क्यूकि बंगाल इस समय आग की भट्टी पर तप रहा है.. देखते है सोना निकलता है या फ़िर राख…

फ़िलहाल बंगाल कोर्ट के आज के घटना क्रम को देखने से लगता है कि कानुन वाकई सडक पर खड़े होकर पत्थर हाथो मे थामे हुये खडा है और खूनखराबे से न्याय छीन रहा है…

इस खबर को 2014 मे “बंगाल का जिन्न,, के रुप मे लिख चुके हैं

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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