
एक शुद्ध सात्विक सनातनी के विचार–
सिर्फ कल्पना कीजिये यदि आसिफ के साथ मंदिर में हुई घटना के तुरंत बाद स्वामी विवेकानन्द को आज शिकागो की धर्म संसद में भाषण देने का अवसर मिलता
तो क्या वह उस ऐतिहासिक भाषण को दे पाते जो 18 वीं सदी में उन्होंने दिया था।
मनुष्य से हिन्दू बनने की सनक ने हमें सीधे तौर पर
सवा सौ साल पीछे धकेल दिया।
प्यासे का धर्म पानी है
भूखे का धर्म भोजन है
कोई अराजक व्यक्ति धर्म के नाम पर एक प्यासे व्यक्ति को मंदिर के परिसर में सिर्फ पानी पीने के प्रयास के कारण पशुओं की तरह मारता है
मंदिर कोई ईंट गारे से बनायी गयी इमारत भर नहीं होती बल्कि किसी महान उद्देश्य के लिये बनाया गया एक भवन होता है। एक दुष्ट आततायी ने न सिर्फ प्यासे को पानी से दूर किया बल्कि अपने पाशविक कृत्य से मंदिर को सामान्य मकान में तब्दील करने का अपराध भी किया है।
अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् ।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥
अर्थ – यह अपना बन्धु है और यह अपना बन्धु नहीं है, इस तरह की गणना छोटे चित्त वाले लोग करते हैं। उदार हृदय वाले लोगों की तो (सम्पूर्ण) धरती ही परिवार है।
सनातन धर्म के मूल संस्कार और उसकी सम्पूर्ण विचारधारा को बताने के लिये ये एक श्लोक पर्याप्त अर्थात काफी है।
ये व्यक्ति कुछ भी हो सकता है पर सनातनी बिल्कुल नहीं है। एक सनातनी होने के कारण में इस घटना से शर्मसार हूँ।