जेल से छूटने के बाद दहाड़े अर्नव,खेल तो अब शुरू हुआ है

*जेल से छूटने के बाद दहाड़े अर्नव,खेल तो अब शुरू हुआ है* देवेंद्र फडणवीस ने अर्नब गोस्वामी को जमानत देने के लिए शीर्ष अदालत की सराहना की, उद्धव ठाकरे सरकार पर बरसे मुंबई: न्यायिक हिरासत में एक सप्ताह जेल में गुजारने और उच्चतम न्यायालय से जमानत मिलने के बाद फिर से न्यूज रूम पहुंचे पत्रकार अर्नब गोस्वामी ने ‘‘फर्जी” मामले में उन्हें गिरफ्तार करने को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर बुधवार को हमला बोला. रिपब्लिक चैनल में अपने सहकर्मियों से घिरे अर्नव गोस्वामी (47) ने कहा, ” उद्धव ठाकरे सुन लो मुझे. आप हार गए.” भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने भी आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में गिरफ्तार रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक को अंतरिम जमानत देने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र की महाविकास अघाडी सरकार को ”उसका स्थान दिखा” दिया गया है. अर्नब गोस्वामी ने एक इंटीरियर डिजाइनर को कथित तौर पर खुदकुशी के लिए उकसाने के 2018 के मामले में अपनी ‘‘अवैध” गिरफ्तारी पर मुंबई के पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को भी आड़े हाथों लिया. गोस्वामी ने कहा कि तलोजा जेल में उनसे पुलिस तीन दौर की पूछताछ करती थी. उन्होंने कहा, ” उद्धव ठाकरे आपने मुझे एक पुराने, फर्जी मामले में गिरफ्तार किया, और मुझसे माफी तक नहीं मांगी.” उन्होंने कहा, ” खेल अब शुरू हुआ है.” गोस्वामी ने कहा कि वह हर भाषा में रिपब्लिक टीवी शुरू करेंगे और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी उनकी उपस्थिति है. फिर से गिरफ्तार होने की आशंका व्यक्त करते हुए गोस्वामी ने कहा, ” मैं जेल के अंदर से भी (चैनल) शुरू करूंगा, और आप (ठाकरे) कुछ नहीं कर पाएंगे.” गोस्वामी ने अंतरिम जमानत देने के लिए शीर्ष अदालत का आभार जताया. भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में गिरफ्तार रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक को अंतरिम जमानत देने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र की महा विकास अघाडी सरकार को ”उसका स्थान दिखा” दिया गया है. पूर्व मुख्यमंत्री ने शिवसेना की अगुवाई वाली सरकार पर राज्य में आपातकाल जैसी स्थिति बनाने का आरोप लगाया. विधानसभा में विपक्ष के नेता फडणवीस ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने अदालत की इजाजत लिए बिना बंद मामले को खोल दिया और गोस्वामी के साथ ”सड़क के अपराधी” की तरह सुलूक किया. उन्होंने आरोप लगाया, “उन्हें (गोस्वामी) को सरकार ने प्रताड़ित किया और एक जेल से दूसरी जेल भेजती रही. यह सरकार निजी दुश्मनी की वजह से उनके पीछे पड़ी है.”

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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