
बरेली। पीडब्ल्यूडी के निर्माण खंड भवन में सामने आए 1.28 करोड़ रुपये के एरियर घोटाले में सरकारी धन की पूरी वसूली तो हो गई, लेकिन जिम्मेदारों पर कार्रवाई अब भी अटकी हुई है। फर्जी हस्ताक्षर और जाली प्रविष्टियों के जरिए सरकारी रकम चपरासियों और करीबी अभियंताओं के वेतन खातों में पहुंचाई गई थी। मामले के मुख्य आरोपी वरिष्ठ सहायक अभिषेक सक्सेना ने रकम वापस करा दी, लेकिन इसके बावजूद एफआईआर और निलंबन जैसी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है। अधिकारी मुख्यालय से अंतिम जांच रिपोर्ट मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
निर्माण खंड भवन में फर्जीवाड़े का तरीका भी चौंकाने वाला था। फर्जी वेतन और एरियर के नाम पर 68.52 लाख और 60.21 लाख रुपये के दो बिल तैयार किए गए। इनके माध्यम से रकम अलग-अलग कर्मचारियों और करीबियों के खातों में भेजी गई। एक चपरासी के खाते में 17 मार्च को 2.15 लाख रुपये पहुंचे तो अभिषेक ने उसे बताया कि यह रकम गलती से दूसरे कर्मचारी की आ गई है। उसने रुपये निकालकर देने को कहा और चालान के जरिए विभाग में जमा कराने का भरोसा दिया। चपरासी ने डर के चलते 2.15 लाख रुपये में से 2.15 लाख रुपये निकालकर उसे दे दिए। यहां तक कि एक मृत कर्मचारी की पत्नी के खाते में भी रकम भेजी गई।
महालेखाकार प्रयागराज की जांच में 11 भुगतानों में से 10 को फर्जी पाया गया था। इसके बाद विभाग ने पूरे 1.28 करोड़ रुपये की वसूली का दावा किया। चार बाबुओं का वेतन रोका जा चुका है और एक कर्मचारी के निलंबन की संस्तुति भी भेजी गई है। कोतवाली में छह लोगों के नाम से तहरीर दी गई, लेकिन उस पर केवल एक ही हस्ताक्षर होने के कारण पुलिस ने एसएसपी से अनुमति मांगी है। ऐसे में रकम वापस होने के बावजूद घोटाले में शामिल लोगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
जांच की आंच एक्सईएन तक, अब्दुल सत्तार के भी बयान दर्ज
1.28 करोड़ रुपये के फर्जी भुगतान प्रकरण की जांच में निर्माण खंड भवन के अधिशासी अभियंता अब्दुल सत्तार की भूमिका भी जांच के दायरे में है। कमेटी उनके बयान दर्ज कर चुकी है। जांच अधिकारियों के मुताबिक, पड़ताल केवल रकम निकालने और खातों में स्थानांतरित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भुगतान की पूरी विभागीय प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था की भी जांच हो रही है। यह भी देखा जा रहा है कि इतनी बड़ी रकम का फर्जी भुगतान होता रहा और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई।
इस पूरे मामले में कार्रवाई मुख्यालय से मिलने वाली जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होगी। अभी कुछ नहीं हो सकता है।— सीपी गुप्ता, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी