आंखों के संक्रमण को हल्के में न लें ; जानिए क्या हैं गंभीर खतरे के संकेत



बरेली। आंखों में होने वाला साधारण सा इन्फेक्शन यदि समय पर न पहचाना जाए, तो यह दृष्टि को हमेशा के लिए प्रभावित कर सकता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, आंखों का संक्रमण किसी को भी अपनी चपेट में ले सकता है। आमतौर पर लोग इसे सामान्य ‘कंजंक्टिवाइटिस’ (आंख आना) मानकर घरेलू नुस्खों पर निर्भर हो जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह लापरवाही कॉर्निया को भारी नुकसान पहुँचा सकती है।
कंजंक्टिवाइटिस बनाम केराटाइटिस: फर्क समझना जरूरी
कंजंक्टिवाइटिस: यह आंखों के सफेद भाग और पलकों की भीतरी झिल्ली में होने वाली सूजन है, जो वायरल या बैक्टीरियल कारणों से होती है। इसमें आंखों का लाल होना, पानी आना, खुजली और चिपचिपा स्राव होना आम बात है। वायरल और बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस एक व्यक्ति से दूसरे में तेज़ी से फैल सकता है।
केराटाइटिस (कॉर्निया का संक्रमण): यह स्थिति कहीं अधिक गंभीर होती है। कॉर्निया आंख की सामने वाली पारदर्शी परत होती है। इसमें संक्रमण होने पर आंख में तेज दर्द, रोशनी से परेशानी, पानी बहना और दृष्टि अचानक धुंधली होने लगती है। गंभीर ‘माइक्रोबियल केराटाइटिस’ की स्थिति में कॉर्निया पर घाव या अल्सर बन सकते हैं, जिससे स्थायी रूप से देखने की क्षमता जा सकती है।
कॉन्टैक्ट लेंस यूजर्स रहें सबसे ज्यादा सतर्क
गर्मियों और बरसात के मौसम में आंखों के संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। विशेष रूप से कॉन्टैक्ट लेंस का गलत या असावधानी से इस्तेमाल करने वालों में केराटाइटिस का जोखिम कई गुना अधिक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लेंस का उपयोग करने वाले लोगों को आंख में हल्की सी भी परेशानी होने पर तुरंत लेंस हटाकर डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
हर लाली संक्रमण नहीं होती
आंखों में होने वाली हर तरह की लाली या खुजली संक्रामक नहीं होती। धूल, परागकण (पॉलेन) या कॉस्मेटिक्स से होने वाली एलर्जी भी आंखों को लाल कर सकती है। इसलिए बिना जांच कराए किसी भी आई ड्रॉप का उपयोग करने के बजाय सटीक कारण का पता लगाना आवश्यक है।
तुरंत डॉक्टर को कब दिखाएं?
डॉक्टरों के अनुसार, यदि नीचे दिए गए लक्षण दिखें तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ (Eye Specialist) से संपर्क करें:
आंख में असहनीय या तेज दर्द होना।
रोशनी सहन न कर पाना (लाइट इनटॉलरेंस)।
दृष्टि अचानक धुंधली हो जाना।
आंख में अत्यधिक लाली का कई दिनों तक बने रहना।
सलाह: समय पर सही जांच और उचित इलाज ही आंखों को गंभीर नुकसान से बचा सकता है। घरेलू उपायों के भरोसे रहकर स्थिति को बिगड़ने न दें।

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पं.सत्यम शर्मा

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