क्या ऑफिस की ‘गंदी राजनीति’ निगल रही है आपका सुकून ? मानसिक सेहत बचाने के जानें 6 अचूक नियम

बरेली। ​ काम की थकान आराम से मिट जाती है, लेकिन दफ्तर की राजनीति से उपजा मानसिक तनाव अवसाद (Depression) का कारण बन सकता है।
सुबह अलार्म बजते ही सीने में भारीपन, रविवार की शाम से ही सोमवार का डर और दफ्तर की लॉबी में कदम रखते ही धड़कनों का तेज होना—अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो समझ लीजिए कि समस्या आपके काम में नहीं, आपके कार्यस्थल के माहौल में है।
​हालिया कॉर्पोरेट सर्वे बताते हैं कि लगभग 68% प्रोफेशनल्स काम के दबाव से ज्यादा दफ्तर की आंतरिक राजनीति, गुटबाजी और पीठ पीछे चलने वाली कानाफूसी (Gossip) से मानसिक रूप से टूट रहे हैं। ‘कौन किसका खास है’ और ‘किसने किसका काम अपने नाम कर लिया’, इस भाग-दौड़ में सबसे ज्यादा नुकसान ईमानदार और मेहनती कर्मचारियों की मानसिक सेहत का होता है।
​यदि आप भी ऐसे माहौल से जूझ रहे हैं, तो इन 6 ठोस रणनीतियों को अपनी सुरक्षा ढाल बनाएं:
​1. प्रतिक्रिया नहीं, सिर्फ अवलोकन करें (Observe, Don’t Absorb)
​गंदी राजनीति करने वालों का पहला हथियार होता है—आपको भड़काना ताकि आप गुस्से या हताशा में कोई गलती करें। जब भी कोई उकसाने वाली स्थिति बने, तुरंत जवाब देने के बजाय एक मनोवैज्ञानिक दूरी बनाएं। मन ही मन खुद से कहें: “यह उनकी असुरक्षा है, मेरी नहीं।” तटस्थ रहें और केवल तथ्यों पर बात करें।
​2. ‘गॉसिप सिंडिकेट’ के सामने खींचें लक्ष्मण रेखा
​दफ्तर की कैंटीन या चाय की टपरी अक्सर अफवाहों की फैक्ट्री होती है। जब कोई सहकर्मी किसी अनुपस्थित साथी की बुराई शुरू करे, तो या तो विनम्रता से कहें—”मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है, चलो काम पर फोकस करते हैं,” या सीधे बहाना बनाकर वहां से हट जाएं। आपकी मौन सहमति भी राजनीति का हिस्सा मान ली जाती है।
​3. पुख्ता ‘पेपर ट्रेल’ (Paper Trail): कोई न चुरा सके आपका क्रेडिट
​ऑफिस पॉलिटिक्स की सबसे आम बीमारी है ‘क्रेडिट हाइजैकिंग’। इससे बचने के लिए हर मौखिक निर्देश, चर्चा और प्रोजेक्ट अपडेट के बाद एक ‘फॉलो-अप ईमेल’ जरूर भेजें (जैसे: “As per our discussion earlier today…”)। लिखित रिकॉर्ड के सामने चालाकी ज्यादा दिन नहीं टिकती।
​4. पर्सनल लाइफ पर सख्त ‘डिजिटल व इमोशनल फायरवॉल’
​सहकर्मी अच्छे दोस्त हो सकते हैं, लेकिन अपनी निजी कमजोरियां, पारिवारिक झगड़े या वित्तीय परेशानियां कभी दफ्तर में साझा न करें। राजनीति करने वाले आपकी इन्हीं भावनाओं और व्यक्तिगत बातों को मौका मिलते ही आपके खिलाफ इस्तेमाल करते हैं।
​5. ‘अलाइ नेटवर्क’ (Allies) बनाएं, गुटबाजी नहीं
​हर ऑफिस में कुछ ऐसे सुलझे हुए लोग जरूर होते हैं जो केवल काम और सकारात्मकता में यकीन रखते हैं। ऐसे लोगों से स्वस्थ कामकाजी रिश्ते बनाएं। जब आपके पास काम का सम्मान करने वाले सहकर्मियों का समूह होता है, तो अकेलेपन और उपेक्षा का डर खत्म हो जाता है।
​6. वर्कस्पेस और घर के बीच एक ‘डीकंप्रेशन ज़ोन’ रखें
​दफ्तर की राजनीति का जहर अपने घर की चौखट तक न ले जाएं। ऑफिस से निकलते ही 15-20 मिनट का समय संगीत सुनने, टहलने या गहरी सांस लेने में बिताएं, ताकि दिमाग कार्यस्थल के तनाव से ‘डिटैच’ हो सके।

About The Author

पं.सत्यम शर्मा

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अपडेट खबर के लिए इनेबल करें OK No thanks