
बरेली। अस्पतालों के बढ़ते खर्च और मेडिकल इमरजेंसी के दौर में हेल्थ इंश्योरेंस आज हर परिवार की पहली ढाल बन चुका है। लेकिन थोड़े से प्रीमियम के चक्कर में अपनी पुरानी बीमारियां (Pre-existing Diseases) छुपाना भारी पड़ सकता है। लोग सोचते हैं कि कंपनी को क्या ही पता चलेगा, लेकिन क्लेम के वक्त यही ‘चतुराई’ पूरे परिवार को संकट में डाल देती है।
अस्पताल पहुंचते ही खुलती है पोल
जब मरीज भर्ती होता है और क्लेम फाइल किया जाता है, तब बीमा कंपनी के डॉक्टरों का पैनल पुरानी मेडिकल फाइल्स, प्रिस्क्रिप्शन और दवाओं की गहन जांच करता है। यदि जांच में यह सामने आ जाए कि डायबिटीज, बीपी या दिल से जुड़ी बीमारी पॉलिसी लेने से पहले से थी और फॉर्म में नहीं बताई गई, तो कंपनी बिना किसी देरी के क्लेम खारिज (Reject) कर देती है।
बीमारी छुपाने पर हो सकते हैं ये 3 बड़े नुकसान:
तुरंत क्लेम रिजेक्शन: इमरजेंसी के वक्त अस्पताल का पूरा बिल खुद जेब से भरना पड़ेगा।
पॉलिसी स्थायी रूप से रद्द: बीमा ‘आपसी भरोसे’ (Utmost Good Faith) के नियम पर काम करता है। पुरानी गंभीर बीमारी छुपाने को धोखाधड़ी (Fraud) माना जाता है और पॉलिसी हमेशा के लिए रद्द कर दी जाती है।
जमा प्रीमियम और बोनस का नुकसान: पॉलिसी रद्द होते ही सालों से भरा गया प्रीमियम डूब जाता है, कोई रिफंड नहीं मिलता। साथ ही ‘नो-क्लेम बोनस’ और फ्री हेल्थ चेकअप जैसे सभी फायदे तुरंत खत्म हो जाते हैं।
सच्चाई बताने में ही समझदारी
पॉलिसी लेते समय हर छोटी-बड़ी बीमारी की सही जानकारी दें। हो सकता है कंपनी थोड़ा प्रीमियम बढ़ा दे या कुछ समय का ‘वेटिंग पीरियड’ लगा दे, लेकिन संकट के समय क्लेम मिलने की पूरी गारंटी रहेगी और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी।