

बरेली। नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर अगवा करने, बंधक बनाकर दुष्कर्म करने और उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराकर निकाह की कोशिश करने के सनसनीखेज मामले में अदालत ने नजीर पेश करने वाला सख्त फैसला सुनाया है। माननीय पॉक्सो विशेष न्यायालय ने अभियुक्त अकबर को विभिन्न गंभीर धाराओं और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास तथा कुल ₹33,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न चुकाने पर दोषी को अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
घर में बंधक बनाकर किया था दुराचार
अभियोजन कथानक के अनुसार, पीड़िता की मां (वादिनी) ने शिकायत दर्ज कराई थी कि मोहल्ला मठलक्ष्मीपुर (थाना इज्जत नगर, बरेली) का निवासी अकबर पुत्र अनीस अहमद उसकी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा ले गया था। आरोपी ने किशोरी को अपने मकान में छिपाकर बंधक बनाए रखा और उसके साथ दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं, उसने पीड़िता पर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव बनाते हुए धर्मांतरण कराया और निकाह करने का प्रयास किया। मामले में थाना आंवला पर मु०अ०सं० 13/2018 धारा 363, 366, 344, 376, 295क भादंवि व 4 पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
अदालत में पेश किए 8 मजबूत गवाह
डीजीपी उत्तर प्रदेश के निर्देश पर चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत यह केस प्राथमिकता पर चिन्हित किया गया था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य के निर्देशन तथा नोडल अधिकारी एसपी साउथ अंशिका वर्मा के पर्यवेक्षण में अदालत में प्रभावी पैरवी की गई। विशेष लोक अभियोजक द्वारा न्यायालय में 8 गवाहों के ठोस बयान दर्ज कराए गए और वैज्ञानिक व दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पॉक्सो कोर्ट ने अकबर को दोषी मानते हुए फैसला सुनाया।