
बरेली, आजमगढ़। करीब एक दशक तक मऊ, आजमगढ़ और आसपास के इलाकों में आतंक का पर्याय रहे कुख्यात अपराधी सुजीत सिंह उर्फ ‘बुढ़वा’ का 18 अगस्त 2017 को पुलिस मुठभेड़ में अंत हो गया था। D-9 गैंग के सरगना सुजीत पर हत्या, लूट, डकैती और रंगदारी समेत 40 से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज थे। व्यापारियों और डॉक्टरों से रंगदारी वसूलना तथा विरोध करने पर हत्या करना उसकी अपराध शैली का हिस्सा था।
11 अगस्त 2017 को पुलिस अभिरक्षा से हुआ था फरार
मऊ से रामपुर जेल ले जाते समय शौच का बहाना बनाकर सुजीत पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। इसके बाद उसने अपने साथियों के साथ आजमगढ़-जौनपुर क्षेत्र में कई वारदातों को अंजाम देकर गैंग को फिर सक्रिय करने की कोशिश की। उसकी बढ़ती गतिविधियों पर पुलिस ने उस पर इनाम बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया।
शारदा चौक से शुरू हुई मुठभेड़, कांशीराम कॉलोनी में हुआ अंत
18 अगस्त को शारदा चौक पर वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने बाइक सवार बदमाशों को रोकने का प्रयास किया तो उन्होंने फायरिंग कर दी, जिसमें सिपाही आनंद घायल हो गए। पीछा करते हुए पुलिस टीम ने सठियांव चौराहे के पास गजहड़ा स्थित कांशीराम आवास कॉलोनी में बदमाशों को घेर लिया। बदमाशों की फायरिंग में एसओ मुबारकपुर और स्वाट सिपाही अवधेश सिंह भी घायल हुए।
पुलिस की जवाबी कार्रवाई में 50 हजार का इनामी सुजीत सिंह उर्फ ‘बुढ़वा’ मारा गया, जबकि उसका साथी भागने में सफल रहा। यह कार्रवाई तत्कालीन एसपी आजमगढ़ अजय साहनी के नेतृत्व में बड़ी उपलब्धि मानी गई। बाद में उनके साहसिक पुलिस अभियानों के लिए उन्हें प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।