
लखनऊ में प्रतिमा स्थापित न हुई तो 2027 से पहले आर-पार की लड़ाई का ऐलान — ए.के. कुशवाहा
सरकार में शामिल उपमुख्यमंत्री समेत समाज के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठे सवाल — लल्ला मौर्य
बरेली/लखनऊ। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित पत्रकार वार्ता में सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की प्रतिमा को लेकर सरकार के प्रति समाज में बढ़ते आक्रोश का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। फाउंडेशन के अरविंद कुमार कुशवाहा एडवोकेट ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के आदेश पर वर्ष 2001 में सरकार के बजट से सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की करीब 9 फीट ऊंची प्रतिमा बनवाई गई थी, लेकिन 26 वर्ष बीत जाने के बावजूद लखनऊ में प्रतिमा स्थापित करने के लिए पार्क चिन्हित नहीं किया जा सका है।
अरविंद कुमार कुशवाहा ने कहा कि प्रतिमा लंबे समय से मूर्तिकार के यहां धूल फांक रही है। उन्होंने कहा कि सरकार बनाने में समाज की महत्वपूर्ण भूमिका होने के बावजूद भाजपा से जुड़े समाज के राज्यसभा सांसद, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, उपमुख्यमंत्री और मंत्री इस मामले में प्रभावी पहल नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज की भावनाओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है।

कुशवाहा ने चेतावनी देते हुए कहा कि अब समाज चुप बैठने वाला नहीं है। यदि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा लखनऊ में सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की प्रतिमा स्थापित नहीं कराई गई तो कुशवाहा, मौर्य, शाक्य और सैनी समाज के लोग एकजुट होकर सरकार के खिलाफ राजनीतिक रूप से बड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर होंगे।
फाउंडेशन के महासचिव लल्ला मौर्य एडवोकेट ने कहा कि 22 अगस्त को गांधी भवन, लखनऊ में सुबह 11 बजे आयोजित स्नेह मिलन समारोह एवं प्रबुद्ध वर्ग सम्मान समारोह में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी की उपस्थिति में समाज के लोगों से प्रतिमा स्थापना के लिए संघर्ष को और तेज करने का आह्वान किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जब तक लखनऊ के किसी उपयुक्त पार्क में सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की प्रतिमा स्थापित नहीं हो जाती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। पत्रकार वार्ता में वक्ताओं ने सरकार से जल्द से जल्द पार्क चिन्हित कर प्रतिमा स्थापित कराने की मांग की।