
बरेली। आंखों के सामने मानो कि किसी फिल्म की तरह कोई सीन हो, सात साल से परिवार से बिछड़ी एक मां को आखिरकार उसके बेटों का साथ मिल गया। मनोसमर्पण सेवा संस्थान के लगातार प्रयासों से रानी देवी का उनके परिजनों से भावुक मिलन हुआ। वर्षों से मां की तलाश में जुटे दोनों बेटों की आंखों में उस समय खुशी के आंसू छलक पड़े, जब उन्होंने संस्थान में अपनी मां को सामने देखा। मां-बेटों का यह मिलन वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए भावुक क्षण बन गया।
जानकारी के मुताबिक, 4 अगस्त 2026 को थाना भमोरा क्षेत्र के बल्लिया गांव में एक महिला के भटकते मिलने की सूचना समाजसेवी अंबर गुप्ता और दीपक पाठक ने मनोसमर्पण सेवा संस्थान को दी। सूचना पर भमोरा पुलिस ने महिला को रेस्क्यू कर रजऊ परसपुर स्थित मनोसमर्पण सेवा संस्थान में दाखिल कराया। उस समय महिला अपनी पहचान और परिवार के बारे में स्पष्ट जानकारी देने की स्थिति में नहीं थीं। महिला को सुरक्षित संस्थान तक पहुंचाने और रेस्क्यू प्रक्रिया में मनोसमर्पण टीम की पारुल जायसवाल और सनी गहलोत की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
काउंसलिंग में मिली परिवार तक पहुंचने की कड़ी
संस्थान में महिला की देखभाल के साथ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपचार और काउंसलिंग शुरू की गई। लगातार देखभाल और उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार आने लगा। संस्थान के फाउंडर एवं साइकोलॉजिस्ट शैलेश शर्मा के निर्देशन में महिला की समय-समय पर काउंसलिंग की गई। इसी दौरान महिला ने स्वयं को भागलपुर, बिहार का निवासी बताया।
इस जानकारी को आधार बनाकर संस्थान की टीम ने परिवार की तलाश शुरू की। टीम ने कजरैली थाना, जिला भागलपुर, बिहार से संपर्क कर महिला के बारे में जानकारी साझा की। लगातार प्रयासों के बाद महिला की पहचान रानी देवी पत्नी अनंत प्रसाद शर्मा, निवासी ग्राम केलापुर, कजरैली, पोस्ट एवं थाना कजरैली, जिला भागलपुर, बिहार के रूप में हुई। इसके बाद उनके परिजनों का पता लगाकर उन्हें रानी देवी के बरेली में सुरक्षित होने की जानकारी दी गई।
सात साल बाद मां को देखकर छलक उठीं बेटों की आंखें
मां के मिलने की खबर सुनकर उनके दोनों बेटे दिनेश और दिलीप मनोसमर्पण सेवा संस्थान पहुंचे। बेटों ने बताया कि उनकी मां करीब सात वर्ष पहले मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के चलते घर से लापता हो गई थीं। लंबे समय तक मां की कोई जानकारी नहीं मिलने से परिवार बेहद चिंतित था और लगातार उनकी तलाश करता रहा।

संस्थान पहुंचकर जैसे ही दोनों बेटों ने अपनी मां को देखा, उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। वर्षों से बिछड़े मां-बेटों ने एक-दूसरे को गले लगाया तो वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। परिजनों के अनुसार रानी देवी के पति अनंत प्रसाद शर्मा हैं। उनके चार बच्चे हैं, जिनमें दो पुत्र दिलीप और दिनेश तथा दो पुत्रियां संगीता और बबीता हैं।
शैलेश शर्मा बोले- इससे बड़ी खुशी और क्या होगी
मनोसमर्पण सेवा संस्थान के फाउंडर एवं साइकोलॉजिस्ट शैलेश शर्मा ने कहा, “एक मां को उसके खोए हुए बच्चे मिल गए और बच्चों को उनकी खोई हुई मां मिल गई। इससे अच्छा और क्या हो सकता है। किसी बिछड़े हुए परिवार को फिर से मिलते देखना हमारे लिए सबसे बड़ी खुशी और संतोष की बात है।”
उन्होंने बताया कि मनोसमर्पण सेवा संस्थान लंबे समय से बेसहारा, गरीब और सड़कों पर भटक रहे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों की सहायता, देखभाल और मनोवैज्ञानिक परामर्श के लिए कार्य कर रहा है। संस्था का उद्देश्य ऐसे लोगों को सुरक्षित आश्रय और उपचार उपलब्ध कराने के साथ उनके परिवारों की तलाश कर उन्हें सम्मानपूर्वक अपनों से मिलाना भी है।
पहचान और सत्यापन के बाद परिजनों को सौंपा
आवश्यक पहचान एवं सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद मनोसमर्पण सेवा संस्थान के सोशल वर्कर रंजीत मौर्य और शिवम कुमार ने रानी देवी को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। सात वर्षों से बिछड़ा परिवार एक बार फिर साथ आया तो संस्थान की टीम के चेहरों पर भी खुशी और संतोष नजर आया।
मनोसमर्पण सेवा संस्थान के प्रयासों से हुआ यह भावुक मिलन इस बात की मिसाल है कि संवेदनशीलता, उचित देखभाल, काउंसलिंग और लगातार प्रयासों के जरिए वर्षों से बिछड़े परिवारों को भी दोबारा मिलाया जा सकता है।