
हिंदू धर्म में सावन के महीने में दाढ़ी न बनाने की परंपरा का संबंध धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक प्रथाओं से है, लेकिन क्या इसका कोई वैज्ञानिक कारण भी है
सावन में दाढ़ी न बनाने से त्वचा संक्रमण से बचाव होता है
दाढ़ी न काटने से त्वचा को प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है
सावन में दाढ़ी बढ़ने देना हार्मोनल परिवर्तन का समर्थन करता है
सावन का महीना 11 जुलाई से शुरू हो गया है. ये 9 अगस्त तक चलेगा. सावन का महीना भारतीय संस्कृति में भगवान शिव का पवित्र महीना माना जाता है. ये समय बरसात का भी होता है, लिहाजा कृषि और समृद्धि का भी सीधा रिश्ता इससे है. धार्मिक तौर पर लोग इस महीने में कई बातों का निषेध करते हैं, जिसमें एक ये भी है कि वो दाढ़ी नहीं बनाते. क्या साइंस भी इसे सही ठहराती है.
बेशक हम मानते हों कि सावन के महीने में खान-पान से लेकर रोजाना के जीवन से संबंधित कुछ स्वैच्छिक पाबंदियां हिंदू धर्म की पुरानी मान्यताओं और धार्मिकता से जुड़ होंगी. बहुत से लोग इस पूरे 30 दिन दाढ़ी नहीं बनाते. इसे बढ़ने देते हैं. क्या इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक या व्यावहारिक कारण भी हो सकते हैं. हां इसके कुछ वैज्ञानिक पहलू तो हैं. साइंस भी इसे जस्टिफाई करता है.
इससे स्वास्थ्य और त्वचा की सुरक्षा होती है
सावन में बारिश के कारण नमी और फंगस का खतरा बढ़ जाता है. दाढ़ी बनाने से त्वचा पर छोटे कट या घाव हो सकते हैं, जिससे संक्रमण (जैसे रिंगवर्म, फोड़े) का जोखिम बढ़ सकता है. गीली हवा के कारण रेजर से शेविंग करने पर त्वचा में जलन या रैशेज होने की आशंका रहती है. शायद इसी वजह से प्राचीन काल में लोग इस मौसम में शेविंग से बचते थे ताकि त्वचा संबंधी समस्याओं से बचा जा सके.
पुराने समय में जब आधुनिक सैनिटाइजेशन और शेविंग उपकरण उपलब्ध नहीं थे, बारिश के मौसम में शेविंग से इंफेक्शन का खतरा हो सकता था. यह परंपरा उसी से उत्पन्न हो सकती है.महामृत्युंजय दर्शन दैनिक के लिए वरिष्ठ पत्रकार आशीष तिवारी की Excuseiv रिपोर्ट