
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा गठित तीन सदस्यीय इन-हाउस पैनल ने दिल्ली के तुगलक क्रिसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के आवास पर जांच के लिए दौरा किया. यह दौरा उस घटना के बाद किया गया है जिसमें उनके आवास के एक स्टोर रूम में 500-500 रुपये के नोटों से भरी अधजली बोरियां मिली थीं.
जांच टीम में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस शील नागू, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जी एस संधावालिया और कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस अनु शिवरामन शामिल हैं. टीम ने उस स्टोर रूम का मुआयना किया जहां ये जले हुए नोट बरामद हुए थे.
विवाद की शुरुआत और कॉलेजियम का फैसला
इस मामले की शुरुआत 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के आवास पर हुई आग की घटना से हुई. आग लगने के बाद स्टोर रूम में जले हुए नोटों के बंडल मिलने से सवाल उठने लगे कि इतनी बड़ी मात्रा में कैश कहां से आया.
इससे पहले, 24 मार्च को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा को उनके पैरेंट कोर्ट (इलाहाबाद हाईकोर्ट) वापस ट्रांसफर करने की सिफारिश का प्रस्ताव जारी किया था. कॉलेजियम ने 20 और 24 मार्च को हुई बैठकों में यह फैसला लिया.
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का विरोध
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के इस फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने कड़ी आपत्ति जताई है. बार एसोसिएशन ने इस फैसले के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है. 23 मार्च को भी एसोसिएशन ने जस्टिस वर्मा को वापस इलाहाबाद भेजने का विरोध किया था और उसी दिन दिल्ली हाईकोर्ट ने उनसे कार्यभार वापस ले लिया था.
बार एसोसिएशन ने एक जनरल हाउस मीटिंग भी बुलाई थी, जिसमें जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की मांग का प्रस्ताव पारित किया गया. साथ ही, मामले की जांच ED (प्रवर्तन निदेशालय) और CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) से कराने की मांग का भी प्रस्ताव पारित किया गया. इस प्रस्ताव की कॉपी सुप्रीम कोर्ट के CJI को भी भेजी गई है.
मामले का घटनाक्रम
14 मार्च: जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में आग लगी, स्टोर रूम में जले हुए नोट मिले.
14 मार्च: कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने राज्यसभा में यह मामला उठाया.
21 मार्च: जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट होने का प्रस्ताव बना.
22 मार्च: CJI संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की इंटरनल जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई.
22 मार्च: सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस के घर से 15 करोड़ कैश मिलने का वीडियो जारी किया.
23 मार्च: कैश कांड की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित.
24 मार्च: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेजने की सिफारिश की.
आज: जांच टीम ने जस्टिस वर्मा के आवास पर दौरा किया.
जस्टिस यशवंत वर्मा का पृष्ठभूमि
जस्टिस यशवंत वर्मा इलाहाबाद हाईकोर्ट में ही बतौर जज नियुक्त हुए थे. इसके बाद अक्टूबर 2021 में उनका दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था. जज बनने से पहले वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में राज्य सरकार के चीफ स्टैंडिंग काउंसिल भी रहे हैं.