आनंदेश्वर कंपनी से पीड़ित किसान ने लगाई एसपी से रक्षा की गुहार
रेत माफिया के गुर्गों ने फसल उखाड़कर किसान को दी जान से मारने की धमकी

आनंदेश्वर फूड एंड कंपनी के द्वारा नियमों को ताक पर रखकर समूचे जिले में रेत का कारोबार चलाया जा रहा है, मनमर्जी के मुताबिक जगह जगह पर बैरी गेट्स भी लगाए गए। किसानों की निजी भूमि से जबरन फसल उखाड़ कर रेत का कार्य प्रगति पथ पर है। गुर्गों की धमकी के कारण एक तो असहाय लोग शिकायत करने की हिम्मत नहीं कर पा रहे और अनेक लोगों ने स्थानीय स्तर से लेकर जिला कार्यालयों तक शिकायती आवेदन प्रस्तुत किए हैं जिन पर अभी तक किन्ही कारणों के चलते कार्यवाही प्रस्तुत नहीं हो सकी।
जिले के सीमावर्ती इलाके के गोयरा थाना अंतर्गत अंजना देवी पति राम हेत प्रजापति ने पुलिस अधीक्षक से रक्षा की गुहार लगाई और विनय किया कि आनंदेश्वर फूड एंड कंपनी के गुर्गे जान से मारने की धमकी दे रहे हैं और जबरन मेरी निजी स्वामित्व की भूमि ग्राम सिंगारपुर खसरा नंबर 148/1 रकवा 1.50 9 जिसमें खेती करता था उसमें फसल उखाड़ कर अवैध रेत का उत्खनन कर रहे हैं। इस प्रकार से अनेक किसानों के साथ ऐसा बर्ताव आनंदेश्वर फूड एंड कंपनी के गुर्गों के द्वारा किया जाता है। जो कि दबाव के चलते शासकीय कार्यालयों में जाकर शिकायत दर्ज भी नहीं करा सकते। दूसरा मामला थाना प्रकाश बम्होरी अंतर्गत है जहां पर पत्थर खदान में पत्थर के धड़कने से देवरिया निवासी विनय कुशवाहा चालक की गाड़ी सुधारते वक्त मौके पर मौत हो गई परिजनों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर पत्थर खदान में कार्य चलता रहा जिस वजह इस प्रकार का हादसा हुआ।
हाल ही के मामलों को लेकर जब बात लवकुश नगर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अविनाश रावत से की गई तो उन्होंने बताया कि जबसे कोरोना काल प्रारंभ हुआ है तो मैं तो इसी में व्यस्त हूं सुनने में जरूर आया था कि नदी किनारे इस प्रकार की रेत को लेकर अव्यवस्थाएं चल रही हैं। तो तुरंत मैंने माइनिंग को फोन किया और जब वहां कोई नहीं पहुंचा तो दूसरी बार भी मैंने फोन किया। जिसमें खनिज इंस्पेक्टर अजय मिश्रा का कहना है कि मेरा स्वास्थ्य खराब चल रहा है जिस वजह मेरा पहुंचना नहीं हो रहा है।
आखिरकार कार्यवाही के नाम पर क्यों कतरा रहे अधिकारी
जिन किसानों की रोजी-रोटी छीन रही है खेत बंजर हो रहे हैं। आखिरकार कोरोना काल के चलते उनके न्याय की चौखट कहां होगी। सूत्रों की अगर मानें तो हालात बद से बदतर हैं लोगों का मानना है कि आनंदेश्वर फूड एंड कंपनी के मालिक का सीधा संबंध प्रदेश के मुखिया से है जिस वजह प्रशासन सदमे में हैं और कार्यवाही के नाम पर कतरा रहा है जिला प्रशासन का अधिनस्थ अमला एक के ऊपर एक कार्यवाही के लिए टाल रहे हैं और जिला प्रशासन दर्शक दीर्घा में बैठा आनंद के लुफ्त ले रहा है आखिरकार जो अधिकारी कर्मचारी कार्यालय में रहकर सेवाएं दे रहे हैं तो मौके पर क्यों नहीं पहुंच पा रहे अगर अस्वस्थ हैं तो घर बैठना चाहिए मगर जब कार्यालयीन सेवाएं दे रहे हैं तो मौके पर पहुंचने में कतराना नहीं चाहिए।
बरसात के मौसम में भी सैकड़ों की तादाद में खड़े ट्रक
वर्षा ऋतु में नदी से किसी भी प्रकार से रेत निकालने की संभावना नहीं है अपितु खेतों को बंजर करके रेत निकालना और शासन को राजस्व का चूना लगाकर सैकड़ों की संख्या में उत्तर प्रदेश परिवहन किया जाता है। आनंदेश्वर कंपनी ने लगभग 78 करोड़ की लागत से स्वीकृत संपूर्ण जिले में रेत का ठेका लिया था जो कि उसके गुर्गे सिर्फ वर्षा ऋतु में ही उस राशि को पूर्ण कर लेंगे। गरीबों के मुह का निवाला छिनना और प्रशासन की इस प्रकार की खामोशी निश्चित रूप से बुंदेलखंड के पिछड़े हुए इलाके में भुखमरी का रोग फैलाएगी।