सांसद ने दिए दावत के साथ संकेत

एटा,लोकसभा चुनाव की आहट के साथ ही प्रत्याशियों का जनता व गणमान्य लोगों से मिलना-जुलना व दावतो का दौर शुरू हों चूका है।एटा -कासगंज लोकसभा सांसद राजवीर सिंह ने भी चुनाव की चौकड़ी बिछानी शुरू कर दी है।

फिलहाल तो राजवीर सिंह को बतौर स्व. कल्याण सिंह के पुत्र की वज़ह से सभी जानते है परंतु एक पहचान यह भी है कि वो एटा लोकसभा से बीजेपी के सांसद है।

*सांसद एटा ने बदायु लोकसभा क्षेत्र कछला पर पत्रकारों को दावत दीं!*

पुरे पांच बरस बीत जाने के बाद राजनीति खुद को दोहराती है. ठीक वैसा ही लग रहा था कि एक बार पुनः सांसद राजवीर सिंह ने दावत देकर पत्रकारों को विदा कर दिया। यह गंगा के किनारे दीं गई दावत इस एटा लोकसभा की आखिरी दावत है।आपको जानकर हैरानी होंगी कि एटा और कासगंज जनपद को छोड़ कर दूसरे जिले में दावत क्यों दीं गई! इस विषय पर पत्रकारों ने कई कयास लगाए कि आखिर ऐसा क्यों किया गया था. आखिर में यह निष्कर्ष निकल कर आया कि वर्तमान की राजनीति में जनपद एटा में पूर्व विधायक महिला ने भूचाल मचा रखा है.डिबाई से पूर्व विधायक अनीता लोधी ने लोकसभा एटा पर खुद के चुनाव लड़ने के संकेत दिए थे। राजनैतिक पंडित बताते है कि अनीता लोधी केंद्रीय राज्य मंत्री बी.एल.वर्मा के बेहद ही करीब है। बीजेपी के कोर कमेटी ने भी पूर्व विधायक अनीता लोधी को एटा लोकसभा क्षेत्र पर लड़ाने के संकेत दिए थे।अब ज़ब दावत खत्म हुई तो चर्चा तो होनी ही थी।क्योंकि एटा से 62 KM की दूरी पर कौन महान व्यक्ति दावत देगा…… खैर बहुत कुछ घटित हुआ है इस दावत में!!

*सौ जूते खाने के बाद भी ख़ुश!!*

दावत खाने के बाद ख़ुशी तो हर किसी को होती ही है क्योंकि भोजन जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। परंतु पत्रकारों के कीमती समय को सांसद एटा राजवीर सिंह ऐसे खा जायेगे,इंच भर भी आभास नहीं था। पत्रकारों द्वारा प्रारम्भिक समय में चिंतन किया जा रहा था कि संभवतः सांसद राजवीर सिंह वरिष्ठ नेता होने का अहसास भी करायेगे और बतायेगे कि लोकसभा एटा में सांसद निधि व केंद्रीय बजट से कितना धन लोकसभा एटा क्षेत्र पर खर्च किया गया है.परंतु पत्रकारों के अनुरूप ऐसा नहीं हुआ और पत्रकार सौ जूते खाने के बाद वापिस लौट आये है… लेकिन ख़ुश है!

*पिछले 15 सालों से लोकसभा सांसद राजवीर सिंह ने एक ही रट लगाई है कि रेल आ रही है!रेल तो आनी ही है।यह प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की झोली में होता है।लेकिन गंगा किनारे कच्छला पर ऐसा क्या था,जो एटा या कासगंज जनपद में नहीं था!दावत ही तो देनी थी बस….*

*वरिष्ठ नेताओ से घिरे रहे सांसद एटा!*

इस विषय पर बात की जाये तो राजवीर सिंह सांसद को वरिष्ठ नेताओ के ही गोल घेरे में बने रहें.अगर सांसद को राजनैतिक चर्चा ही करनी थी तो पत्रकारों को आखिर क्यों बुलावा भेजा गया था। वार्ता के नाम पर सिर्फ सांसद राजवीर सिंह का NIL /0 था।

फिलहाल कल देर शाम पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे को सांसद की तीसरी पारी को बढ़ाने के लिए बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने टिकट दें दीं है.

*चर्चाओ को विराम कौन देगा!*
*चमचे तो खाली कर ही देंगे।*

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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