जवाबी कीर्तन में कलाकारों ने दी धमाकेदार प्रस्तुति

जवाबी कीर्तन में कलाकारों ने दी धमाकेदार प्रस्तुति

साउण्ड सिस्टम कर्मचारी ने मचवाया बवाल

संयोजक के फोन नहीं उठाये अधिकारियों ने, वाट्सअप मैसेज का भी नहीं दिया जवाब
एटा। राजकीय जिला कृषि एवं औद्योगिक विकास प्रदर्शनी के पंडाल में जवाबी कीर्तन के कार्यक्रम में कलाकारों ने धमाकेदार शुरूआत की। श्रीराम, हनुमान और रामायण के प्रसंगों को सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, लेकिन रात्रि 1 बजे कीर्तन का दूसरा दौर शुरू हुआ वैसे ही साउण्ड सिस्टम के कर्मचारी ने सिस्टम बंदकर कार्यक्रम को बंद करा दिया जिससे श्रोतागण आक्रोशित हो गए।
कार्यक्रम का उद्घाटन वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व विधायक प्रजापालन वर्मा ने किया। मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन में सदर विधायक विपिन वर्मा डेविड सहित समस्त पत्रकारों ने सहयोग किया। संयोजक द्वारा समस्त अतिथियों और पत्रकारों का माल्यार्पण और शॉल उढ़ाकर सम्मान किया गया।
प्रदर्शनी में बीते 21 जनवरी की रात्रि को प्रमोद कुमार लोधी और प्रदीप कुमार वर्मा पत्रकार के संयोजकत्व में जवाबी कीर्तन का मुकाबला उरई से आईं राखी आजाद और ब्रजधाम के दिनेश तोमर के मध्य हुआ जिसमें दोनों ही कलाकारों ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों को सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कीर्तन मुकाबले का एक दौर पूरा होकर दूसरी बार राखी आजाद ने जैसे ही माइक पर गाना शुरू किया साउण्ड सिस्टम के कर्मचारी ने बिना बताये साउण्ड बंद कर दिया। कार्यक्रम पहले राउण्ड के बाद रोचक होने लगा था तभी साउण्ड बंद होने से अफरा तफरी मच गई। साउण्ड कर्मचारी 1 बजे के बाद साउण्ड चलाने के बदले 2 हजार रूपये मांग रहा था। संयोजक ने प्रभारी प्रदर्शनी/अपर जिलाधिकारी से फोन द्वारा सम्पर्क किया लेकिन उन्होंने फोन पर बात नहीं की। वाट्सअप मैसेज का भी कोई जवाब नहीं मिला। श्रोताओं ने मंच पर चढ़कर साउण्ड शुरू करा लिया। उसके कुछ देर बाद ही आये सीओ सिटी और कोतवाली इंस्पेक्टर ने साउण्ड कर्मचारी को पीटने तथा गुण्डागर्दी करने का आरोप संयोजक/पत्रकारों पर लगाया।
उल्लेखनीय है कि प्रदर्शनी में जवाबी कीर्तन और रसिया सहित कई कार्यक्रम होते हैं जो मशहूर कलाकारों के आने पर आने पर सुबह तक चलते हैं और श्रोतागण मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहते हैं। इन कार्यक्रमों में श्रोतागण ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं जिन्हें रात्रि भी व्यतीत करनी होती है और अपने प्रिय कलाकारों को भी सुनना होता है। ऐसे में साउण्ड सिस्टम बंदकर उन श्रोताओं को धोखा दिया जाता है जिनके पैसे से ही यह प्रदर्शनी लगाई जाती है और उनके लिए ही लगाई जाती है। इस जनपद के लोग ही प्रदर्शनी का मनोरंजन नहीं ले पायेंगे तो फिर इस प्रदर्शनी के लगाये जाने का औचित्य ही क्या है। अभी तक जितने भी कार्यक्रम हुए हैं जिनमें लखबीर सिंह लक्खा, पंवार और अन्य महंगे कलाकारों के कार्यक्रम 12 बजे तक ही बंद कर दिये गये। कुछ कार्यक्रमों में पुलिस ने बल प्रयोग भी किया। जिसका कारण था कि अधिकारी और अन्य लोग पंडाल में बैठते हैं और वे लोग बाहर होते हैं जिनके लिए प्रदर्शनी लगाई जाती है। कार्यक्रमों में नोडल अधिकारी उपस्थित ही नहीं होते हैं और न संयोजकों को उनका कोई सहयोग ही मिलता है। संयोजक अथक परिश्रम से भीड़ जुटाकर कार्यक्रम को सफल बनाते हैं तो प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग के अभाव में कार्यक्रम प्रदर्शनी ठेकेदार के कर्मचारियों की मनमानी के चलते अराजकता और अव्यवस्था के शिकार हो जाते हैं।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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