2024 की नैया पार लगाने भाजपा बना सकती है मध्यप्रदेश में लाड़ली को मुख्यमंत्री

खरी – अखरी

2024 की नैया पार लगाने भाजपा बना सकती है मध्यप्रदेश में लाड़ली को मुख्यमंत्री

संख्या में मालवा – निमाड से ज्यादा तो महाकौशल से सबसे कम जीती महिलाएं

प्रतिशत में भाजपा के खाते विंध्य 13.33 पहले तो दूसरे स्थान पर है मालवा – निमाड 12.12

विधानसभा में सबसे ज्यादा महिलाओं की भागीदारी 19.23 फीसदी बुंदेलखंड से तो सबसे कम महाकौशल से 5.26 फीसदी

विधानसभा चुनाव में जहां भाजपा ने 26 महिलाओं को मैदान में उतारा तो वहीं कांग्रेस ने 27 महिलाओं को टिकिट दी थी। चुनावी नतीजों पर नजर डाली जाय तो भाजपा की 19 महिलाएं विधायक बनने में सफल रहीं हैं तो कांग्रेस से कुल जमा 4 महिलाओं की ही विधानसभा में एंट्री कन्फर्म हुई है। मतलब जहां भाजपा की 73 फीसदी महिलाएं विधायक बनने में सफल रही हैं वहीं कांग्रेस की मात्र 14.81 प्रतिशत महिलाओं को विधायक बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

6 खंडों में बंटे मध्यप्रदेश में भाजपा की टिकिट पर महाकौशल में 3 में से 1, विंध्य में 5 में से 4, बुंदेलखंड में 2 में से 2, मध्य भारत में 2 में से 2, ग्वालियर – चंबल में 4 में से 2 तथा मालवा – निमाड में 10 में से 8 महिलाओं ने विजयश्री हासिल की है। इसी तरह कांग्रेस से महाकौशल में 5 में से 1, विंध्य में 7 में से 0, बुंदेलखंड में 7 में से 3, मध्य भारत में 1 में से 0, ग्वालियर – चंबल में 0 में से 0 तथा मालवा – निमाड में भी 7 में से 0 महिलाओं ने विजयश्री हासिल की है।

महाकौशल की मंडला विधानसभा से भाजपा की संपतिया उइके तथा बालाघाट विधानसभा से कांग्रेस की अनुभा मुंजारे ने जीत हासिल की है। विन्ध की विधानसभा रैगांव से प्रतिमा बागरी, जयसिंह नगर से मनीषा सिंह, मानपुर से मीना सिंह मांडवे तथा सीधी से रीति पाठक को भोपाल की कन्फर्म टिकिट मिली है। इसी तरह विधानसभा में बुंदेलखंड से ललिता यादव छतरपुर से तथा उमा खटीक हटा भाजपा का तो बीना से निर्मला सप्रे, खरगापुर से चंदा सिंह गौर तथा मलहरा से साध्वी रामसिया भारती कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करेंगी। वहीं मध्य भारत की गोविंदपुरा सीट से कृष्णा गौर तथा घोड़ाडोंगरी से गंगा बाई उइके एवं ग्वालियर – चंबल की चाचौडा सीट से प्रियंका मीणा, सबलगढ सीट से सरला रावत विधायक चुनी गई हैं। इस बार महिला विधायकों की संख्या है मालवा – निवाड से। यहां इंदौर – 4 से मालिनी गौड, महू से ऊषा ठाकुर, धार से नीना वर्मा, पेटलावद से निर्मला भूरिया, बुरहानपुर से अर्चना चिटनीस, खंडवा से कंचन तन्वे, पंधाना से छाया मोरे तथा देवास से गायत्री राजे पवार निर्वाचित होकर प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत की सदस्य बनी हैं।

क्षेत्रवार देखा जाय तो महाकौशल की 38 सीटों पर जहां भाजपा ने 3 तो वहीं कांग्रेस ने 5 महिलाओं को टिकिट दी थी उनमें से दोनों पार्टियों की एक – एक महिला जीती है। प्रतिशत के हिसाब से भी बराबर है 2.63 कुल 5.63। विंध्य की 30 सीटों पर भाजपा ने 5 तो कांग्रेस ने 7 महिलाओं को प्रत्याशी बनाया था। जिसमें केवल भाजपा की ही 4 महिला प्रत्याशियों के खाते जीत आई है 13.33 फीसदी। मध्य भारत को देखें तो यहां की 36 सीटों पर भाजपा ने 2 तथा कांग्रेस ने 1 महिला को उम्मीदवार बनाया जिसमें केवल भाजपा की ही दोनों महिलाएं विधायक बनने में सफल रही प्रतिशत रहा 5.55। बुंदेलखंड में 26 सीटों पर भाजपा की 2 तथा कांग्रेस की 7 महिलाएं अपनी किस्मत आजमा रही थीं जिसमें जहां भाजपा की दोनों दोनों महिलाओं ने बाजी मारी वहीं कांग्रेस की तीन महिलाएं सफल रहीं। भाजपा का प्रतिशत 7.69 तो कांग्रेस का 11.54 कुल 19.23 फीसदी रहा है। ग्वालियर – चंबल की 34 सीटों पर जहां भाजपा ने मात्र 4 महिलाओं को टिकिट दी थी वहीं कांग्रेस ने एक भी महिला को टिकिट नहीं दी। यहां पर दो महिलाओं ने अपनी सीट पर सफलता पाई है। सीटों के हिसाब से प्रतिशत रहा है 5.88। मालवा – निमाड पर नजर डाली जाए तो यहां की 66 सीटों पर भाजपा ने 10 तो कांग्रेस ने 7 महिलाओं को चुनावी समर में उतारा था जिसमें भाजपा की 8 महिलाएं को युध्द जीत में जीत मिली मगर कांग्रेस की सातों महिलाओं के हिस्से पराजय आई। यहां की कुल सीटों पर महिलाओं की जीत का प्रतिशत 12.12 रहा।

प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों पर भाजपा की ओर से 26 तो कांग्रेस की ओर से 27 कुल 53 महिलाएं चुनाव मैदान में थीं। उनमें से भाजपा को 73 फीसदी तो कांग्रेस को 14.81 फीसदी सफलता मिली है। मध्य प्रदेश की 230 सदस्यों वाली विधानसभा में कुल 23 महिलाओं की विधायक के रूप में मौजूदगी रहेगी मतलब मात्र 10 फीसदी जिसमें भाजपा के 163 सदस्यों में 19 महिला सदस्य हैं तो कांग्रेस के 66 सदस्यों में 4 महिला सदस्य हैं। प्रतिशत की दृष्टि से देखा जाए तो जहां कांग्रेस का प्रतिशत 16.50 होता है तो वहीं भाजपा का 11.66 प्रतिशत है।

भाजपा हाईकमान या यूं कहें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभी तक मध्य प्रदेश के लिए अपने सिपहलार (मुख्यमंत्री) का चयन नहीं कर पाए हैं। 18 साल से भाजपा की पतवार सम्हाले शिवराज सिंह चौहान को रिप्लेस करने के लिए ही केन्द्रीय मंत्रियों, सांसदों और राष्ट्रीय महासचिव को चुनाव में उतारा गया था साथ ही इनमें से किसी को भी मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने के बजाय मोदी के नाम पर वोट मांगे गये थे। मगर प्रदेश में जिस तरह की जीत मिली है उससे खुद भाजपा हाईकमान भौंचक है। 163 सीटों पर मिली जीत के श्रेय का बड़ा हिस्सा शिवराज के खाते में जाने के बावजूद भी मोदी एंड कंपनी शिवराज सिंह चौहान को प्रदेश की कमान सौंपने से परहेज कर रही है । 2024 के आम चुनाव को देखते हुए मोदी एंड कंपनी ओबीसी से आ रहे शिवराज के स्थान पर ओबीसी वर्ग से ही किसी दूसरे को प्रदेश की कमान सौंपना चाह रही है। मध्य प्रदेश में भाजपा की भारी-भरकम जीत में लाड़लियों के योगदान को नकारना 2024 के आम चुनाव में भाजपा हाईकमान को मंहगा पड़ सकता है। सूत्रों की मानें तो मोदी एंड कंपनी मध्यप्रदेश की लगाम किसी लाड़ली को भी सौंप सकती है क्योंकि भाजपा की 19 लाड़लियों में सभी वर्ग की लाड़ली शामिल हैं।

अश्वनी बडगैया अधिवक्ता
स्वतंत्र पत्रकार

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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