
बुद्ध ने जब जन्म लिया और जब वे केवल चौबीस घंटे के थे तो
एक संबुद्ध व्यक्ति उनके पास पहुंचा और उसने रोते हुए उस बच्चे के पैर छुए। गौतम बुद्ध के पिता को यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ, उनको अपने आंखो पर विश्वास नहीं हो रहा था।
क्योंकि यह व्यक्ति बहुत प्रसिद्ध था। और बुद्ध के पिता भी उसके पास जाते थे। वे सोच रहे थे कि क्या इस आदमी का दिमाग खराब हो गया है। जो यह चौबीस घंटे पहले पैदा हुए बच्चे के पैर छू रहा है। बुद्ध के पिता ने उनसे पूछा, क्या मैं आपसे पूछ सकता हूं कि आप इस छोटे से शिशु के पैर क्यों छू रहे है ।ʼ
उस संबुद्ध व्यक्ति ने कहा : मैं इसके पैर छू रहा हूं
क्योंकि में इसकी भावी संभावना को देख सकता हूं ।
अभी तो यह कली है, लेकिन जल्दी ही यह पूर्ण विकसित कमल बन जाएगा। और बुद्ध के पिता–शुद्धोधन उनका नाम था–ने उनसे पूछा , तो आप रो क्यों रहें हैं। अगर कमल खिलने वाला है । तो आपको तो इसके लिए खुश होना चाहिए।
उस वृद्ध व्यक्ति ने कहा : मैं इसलिए रो रहा हूं क्योंकि,
जब यह कमल बनेगा, तब में नहीं रहूंगा हां किसी खास क्षणों में बुद्ध पुरूष भी रो पड़ते हैं । ओशो