
*किसी भी धार्मिक सभा में व्यधान डालना है अपराध, जानिए* *IPC में क्या है सज़ा*
*धारा 296 के अंतर्गत परिभाषित अपराध एक जमानती और संज्ञेय अपराध है.* *इस तरह के मामलों में अपराधी को बिना वारंट Warrant के गिरफ्तार किया जा सकता है. इस तरह के अपराध में समझौता नहीं किया जा सकता है।*
*सनातन धर्म के पवित्र उपासना स्थल श्री शीतला माता सेवा धाम जन कल्याण ट्रस्ट आश्रम के पूजा एवं उपासना स्थल पर शांति व्यवस्था भंग करने, पत्रकारिता के नाम पर रंगदारी मांगने के दोषी अखबार एवं चैनल के द्वारा भ्रामक प्रचार किए जाने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 295 से लेकर 298 के अंतर्गत जनतंत्र की आवाज समाचार पत्र के तथाकथित रिपोर्टर सहित इसमें शामिल समाचार पत्र एवं न्यूज़ चैनलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का लिया गया निर्णय* –
राम जनम सिंह चौहान राष्ट्रीय पार्षद एवं राज्य डिप्टी चेयरमैन BMF उत्तर प्रदेश एवं
सचिव श्री शीतला माता सेवा धाम जन कल्याण ट्रस्ट चंधासी।
चंदौली जिला कार्यालय – भारतीय मीडिया फाउंडेशन के राष्ट्रीय पार्षद एवं राज्य डिप्टी चेयरमैन राम जनम सिंह चौहान ने बताया कि हमारा देश विविधताओं का देश है, जहाँ पर विभिन्न धर्मों का पालन करने वाले, विभिन्न भाषाएं बोलने वाले और विभिन्न संस्कृतियों से संबंध रखने वाले लोग रहते हैं. इन सभी भिन्नताओं के बीच, धर्म लोगों के जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है. और एक राष्ट्र के रूप में, साथ रहने के लिए विभिन्न धर्मों के प्रति सहयोग, सहनशीलता और स्वतंत्रता बहुत जरूरी है।
उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर हमारे संविधान में प्रत्येक नागरिक को कई मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं, इन अधिकारों के साथ-साथ आपराधिक कानून में भी प्रावधान बनाए गए हैं, जिसके जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित करता है कि यदि कोई व्यक्ति समाज के किसी वर्ग की धार्मिक आस्था को आहत करता है या उसका प्रयास करता है, तो ऐसे व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
हमारा देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के रूप में जाना जाता है, विविधताओं से भरे हमारे देश में धार्मिक सहनशीलता और सौहार्द सुनिश्चित करने के लिए IPC की धारा 296 में सख्त प्रावधान किए गए है जो उन व्यक्तियों को दंडित करते है जो किसी विशेष धार्मिक सभा में इस हद तक विघ्न पैदा करते हैं या प्रयास करते है कि किसी धार्मिक वर्ग के नागरिक अपनी पूजा या धार्मिक अनुष्ठान को पूरा ना कर पाएं।
भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत धर्म से संबंधित अपराध
भारतीय दंड संहिता के अध्याय 15 में धारा 295 से लेकर 298 तक धर्म से संबंधित अपराधों के विषय में उल्लेख किया गया है।
उपासना के स्थान को क्षति पहुंचाना या अपवित्र करना। (धारा 295)
हर धर्म का अपना उपासना का स्थान होता है जैसे मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा यह उपासना के स्थान उस धर्म और वर्ग के लोगों के लिए सर्वोच्च होते हैं तथा उनकी धार्मिक आस्थाओं का मुख्य केंद्र होते हैं।
इन उपासना के स्थानों को यदि किसी व्यक्ति द्वारा यह जानते हुए कि यह किसी की धार्मिक उपासना का स्थल है उसे क्षति कारित करना या उसे अपवित्र करना दंडनीय अपराध है, इस प्रकार की क्षति कारित करने वाला या उस उपासना के स्थल को अपवित्र करने वाला व्यक्ति उस धर्म के लोगों की आस्थाओं को आघात पहुंचाता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 295 इस प्रकार के कार्य को दंडनीय अपराध करार देती है जिसके अंतर्गत 2 वर्ष तक के कारावास के दंड का निर्धारण किया गया है।