
हिंदू पक्ष की दलील,मौके पर मंदिर होने के साक्ष्य मिले
ज्ञानवापी मामले में मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सैयद फरमान नकवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में ग्राह्यता पर विशेष अनुमति याचिका लंबित है। वाराणसी में 1991 में एक वाद दायर किया। फिर 2021 में दाखिल हुआ है। वाराणसी में 19 वाद दाखिल हैं। सभी वाद बाहरी लोगों ने दायर किए हैं। सिविल जज से जिला जज को केस सौंपे गए हैं।
वादिनी के वकील सौरभ तिवारी ने कहा कि कुछ फोटोग्राफ हैं, जिनसे साफ है कि वहां मंदिर है। साथ ही हाईकोर्ट ने फैसले में कहा है कि वादी को श्रंगार गौरी, हनुमान, गणेश की पूजा दर्शन का विधिक अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि वाद तय करने के लिए सर्वे जरूरी है।
विष्णु जैन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट कमीशन भेजे जाने को चुनौती दी गई है। साक्ष्य के लिए एडवोकेट कमीशन का आदेश हुआ था। एडवोकेट कमीशन के सर्वे में ही मौके पर मंदिर होने के साक्ष्य मिले। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा था कि अदालत का आदेश सही है। कोर्ट ने नियमानुसार कमीशन भेजने का आदेश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि एएसआई विशेषज्ञ की तरह है, उसे पक्षकार बनाया जाना जरूरी नहीं है।
मुस्लिम पक्ष के वकील एसएफए नकवी ने कहा कि एएसआई के हलफनामे में फोटो जो लगाई है। इसमें एएसआई अधिकारी के साथ सरकारी वर्दी वाले कपड़े में कोई कुदाल, फावड़ा लेकर मौके पर गया। आशंका है इसका इस्तेमाल होगा जो इमारत को नुकसान पहुंचा सकती है। नकवी ने यह भी कहा कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 में वाद पोषणीय नहीं है। मौके पर परिवर्तन प्रतिबंधित है। विशेषकर धार्मिक स्थलों की 15 अगस्त 1947 की स्थिति में बदलाव पर रोक है। हम कहते हैं छह सौ साल पुराना है। और वादी कहते हैं हजार साल पुराना। यानी इस भवन में बदलाव नहीं किया जा सकता।