
भारत के राष्ट्रीय हितों के बारे में सुनने को तैयार नहीं हैं, तो वे किस तरह के इंडिया हैं?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विपक्ष के भारी हंगामे के बीच गुरुवार को दोनों सदनों में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया विदेश यात्राओं को लेकर एक विस्तृत बयान दिया। इस दौरान राज्यसभा में जारी हंगामे को लेकर उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधा कि वे भारत के राष्ट्रीय हितों के बारे में सुनने को तैयार नहीं हैं, तो वे किस तरह के इंडिया हैं?
बता दें कि विपक्षी दलों द्वारा हाल में गठित इंडिया गठबंधन मणिपुर की घटना को लेकर संसद में बेहद आक्रामक है। जयशंकर ने जैसे ही बयान देना शुरू किया था, विपक्षी सदस्यों ने मणिपुर हिंसा पर प्रधानमंत्री मोदी के बयान और इस विषय पर चर्चा कराने की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष ने पक्षपातपूर्ण राजनीति को प्राथमिकता दी है।
भारत सभी के लिए उठाता है
?️?️
आवाज जयशंकर ने कहा, आज दुनिया मानती है कि जब भारत आवाज उठाता है तो न केवल अपने लिए बल्कि कई अन्य देशों के लिए आवाज उठाता है। भारत सभी की शांति सुरक्षा और समृद्धि के लिए आवाज उठाता है।
संकट काल में अपने लोगों को कभी नहीं छोड़ेंगे
विदेश मंत्री ने कहा, वैश्विक हित और स्थिरता के लिए एक शक्ति के रूप में काम करते हुए हमने अपने राष्ट्रीय हितों की दृढ़ता से रक्षा की है। हमने अपने कार्यों से यह दिखाया है कि संकट काल में अपने लोगों को कभी नहीं छोड़ेंगे।
राष्ट्रीय हितों के मामलों में राजनीति को दरकिनार करें जयशंकर ने भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को अन्य देशों से सर्वोच्च सम्मान मिलने का जिक्र किया। उन्होंने कहा, अगर आप राष्ट्रपति का सम्मान नहीं कर सकते, उपराष्ट्रपति का सम्मान नहीं कर सकते, प्रधानमंत्री का सम्मान नहीं कर सकते, अगर आप विदेश मंत्री को सदन में बयान देने की अनुमति नहीं देंगे तो फिर यह बहुत खेदजनक स्थिति है। राष्ट्रीय हितों के मामलों में राजनीति को दरकिनार कर देना चाहिए।