
चौधरी साहब किसान बनकर पहुंचे थे रपट लिखाने थाने
यह बात सन् 1979 करीब 42 साल पहले की है, जब चौधरी साहब कानून व्यवस्था का हाल जानने के लिए काफिले को काफी दूर खड़ा कर इटावा जिले ऊसराहार थाने में मैला कुर्ता और धोती पहनकर रपट लिखाने के लिए पहुंच गए थे। उन्होंने दरोगा से बैल चोरी की रिपोर्ट लिखने को कहा। लेकिन सिपाही ने उन्हें इंतजार करने को कहा। कुछ देर तक इंतजार करने के बाद फिर किसान (चौधरी चरण सिंह) ने रपट लिखने की गुहार की, मगर सिपाही ने अनसुना कर दिया। हालांकि, कुछ देर बाद सिपाही ने आकर कहा, ‘चलो छोटे दरोगा जी बुला रहे हैं।’
सिपाही ने मांगा था चौधरी साहब से खर्चा-पानी
दरोगा ने पुलिसिया अंदाज में आड़े-टेढ़े सवाल उनसे पूछे और बिना रपट लिखे किसान को डांट-डपटकर थाने से चलता कर दिया। उनके जाते समय एक सिपाही पीछे से आया और रिपोर्ट लिखने के लिए खर्चा-पानी मांगा। अंत में 35 रुपये की रिश्वत लेकर रिपोर्ट लिखना तय हुआ। मुंशी ने रिपोर्ट लिखकर किसान से पूछा बाबा अंगूठा लगाओगे या हस्ताक्षर करोगे?। इस पर किसान (चौधरी चरण सिंह) ने हस्ताक्षर करने को कहा। जिसके बाद किसान ने हस्ताक्षर में नाम लिखा, चौधरी चरण सिंह और मैले कुर्ते की जेब से मुहर निकाल कर कागज पर ठोंक दी। जिस पर लिखा था, ‘प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया’। ये देख पूरे थाने में हड़कंप मच गया। इसके बाद उन्होंने पूरे ऊसराहार थाने को सस्पेंड कर दिया था। दरअसल, चौधरी साहब उस समय के प्रधानमंत्री थे जो थाने में औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे।