SC का बयान : MP-MLA को सजा सुनाते वक्त थोड़ा ध्यान रखा जाय, सदस्यता जाने का प्रावधान सख्त है

मानहानि केस में गुजरात के सूरत कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद राहुल गांधी किस लोकसभा सदस्यता समाप्त हो चुकी है. सूरत कोर्ट द्वारा राहुल गांधी को 30 दिनों की जमानत दी गई है. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में एक बड़ा बयान दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अदालत जब कभी एमपी एमएलए को सजा सुनाए तो उस वक्त थोड़ा ध्यान रखें. क्योंकि 2 साल की सजा के बाद सदस्यता जाने का प्रावधान अपने आप में काफी कड़ा है.
जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की अदालत ने लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल और केंद्र शासित प्रदेश की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह बात कही,
मोहम्मद फैजल को हत्या के प्रयास के मामले में 10 साल की कैद हुई थी, जिसके बाद उनकी सदस्यता चली गई थी। केरल हाई कोर्ट में उनकी ओर से अपील दायर की गई थी, जिसके बाद सजा पर स्टे लग गया था। इसके बाद भी उनकी सदस्यता बहाल होने में देरी हुई तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। वहीं केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप की ओर से भी एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें मांग की गई थी कि केरल हाई कोर्ट के फैसले पर स्टे लगाया जाए। इन्हीं दोनों अर्जियों पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने निचली अदालतों से सजा सुनाते वक्त थोड़ा संवेदनशील रहने को कहा,
सुनवाई के दौरान अडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने बताया कि जनप्रतिनिधित्व कानून के सेक्शन 8(3) के मुताबिक यदि किसी सांसद अथवा विधायक को दो या उससे ज्यादा साल की सजा होती है तो उसकी सदस्यता तत्काल चली जाती है। इस पर जस्टिस जोफेस ने कहा, ‘लेकिन यह प्रावधान बेहद कड़ा है। इसलिए अदालतों को सजा सुनाते वक्त थोड़ा ध्यान रखना चाहिए।’ बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में केरल हाई कोर्ट के उस फैसले पर अंतरिम रोक से इनकार कर दिया था, जिसमें मोहम्मद फैजल की सजा पर रोक का आदेश दिया गया था।