एटा के मुकावले कासगंज भूजल संचन मे अव्वल, रिपोर्ट योगेश मुदगल

कासगंज,। जल संचय के मामले में भी कासगंज जनपद ने बड़ी छलांग लगाई है। डार्क जोन में चले गए चार ब्लॉक क्षेत्र अब सेफ जोन में आ गए हैं। इन ब्लॉकों को सेफ जोन में लाने में जलशक्ति मंत्रालय का प्लान असरदार रहा। स्कूल, कालेज, सरकारी इमारतों में हुए जल संचय के प्रबंध ने भी कमाल कर दिखाया। इसके साथ में समूचे जिले में खुदाई सफाई कर तैयार किये गए अमृत सरोवरों, बूढ़ी गंगा के अलावा नीम नदी के चेकडैम काम आए।
जल दोहन अधिक होने व भू जल संचयन कम होने से कासगंज करीब 10 साल से अधिक समय तक, सोरों ब्लॉक, सहावर ब्लॉक पांच साल एवं गंजडुंडवारा एक साल तक डार्क जोन श्रेणी में चला गया था। जबकि अन्य ब्लाक अमांपुर, सिढ़पुरा, पटियाली सेफ जोन में चले आ रहे थे। इन ब्लॉकों को डार्क जोन से सेफ जोन में लाने के लिए जल शक्ति मंत्रालय ने तत्कालीन डीएम चन्द्रप्रकाश सिंह के माध्यम से इस पर अभियान चलाया। नतीजा दो साल में हुए बरसात के जल संचय से तीनों ब्लॉक सेफ जोन में आ गए।
एक दशक बाद सेफ जोन में कासगंज
ये है जल स्तर
● 12 मीटर पर कासगंज ब्लॉक क्षेत्र में पानी
● 05 मीटर पर सहावर ब्लॉक क्षेत्र
● 05 मीटर सोरों,ब्लॉक क्षेत्र
● 5 मीटर गंजडुंडवारा क्षेत्र
● 20 मीटर पटियाली ब्लॉक क्षेत्र
● 12 मीटर सिढ़पुरा ब्लॉक क्षेत्र
● 13 मीटर अमांपुर ब्लॉक क्षेत्र में
200 स्कूलों में जल संचय प्रबंध
कासगंज। बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार के मुताबिक 200 स्कूलों व कालेजों में जल संचय प्रबंध किया गया। जिससे बरसाती पानी जमीन में गया। इसके अलावा सरकारी इमारतों, नगर निकायों की इमारतों व ग्राम पंचायतों में भी भूजल संचय पर तेजी से काम हुआ। हैंडपंपों के सहारे प्रबंध किया गया।
80 अमृत सरोवर काम आए बरसाती
जल संचय करने में जनपद में अमृत सरोवरों को तैयार करने के लिए अभियान चलाकर खुदाई, सफाई कराकर बरसाती पानी को एकत्र करने का काम हुआ। इसके अलावा नीम नदी के चैम डेम व बूढ़ी गंगा की खुदाई से भी बरसाती पानी जमीन में गया।
भूगर्भ जल विभाग ने की मॉनीटरिंग
लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता मोहम्मद मुकीम ने बताया जल शक्ति मंत्रालय के निर्देश पर भूगर्भ जल विभाग आगरा के अधिकारियों ने बाकायदा मॉनीटरिंग की गई है। वहां पीजो मीटर लगाकर पता चलाया गया है कि, कितना जल दोहन हुआ और कितना संचय हुआ। हालांकि पटियाली में बरसाती पानी का संचय कम होने और अब जलदोहन अधिक होने पर सेमी किट्रीकल श्रेणी में है।