2023 उत्तर प्रदेश बजट में भी पत्रकारों की कि गई उपेक्षा खाली हाथ मलते रहे पत्रकार

2023 उत्तर प्रदेश बजट में भी पत्रकारों की कि गई उपेक्षा खाली हाथ मलते रहे पत्रकार बजट के खबर को कवरेज करने गए पत्रकारों को मिली लाठियां धक्के मुक्के से किया गया अपमानित
भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के बजट 2023 में भी पत्रकारों को निराशा हाथ लगी पत्रकारों एवं मीडिया कर्मियों के अधिकारों पर 2023 में भी चला हथौड़ा एवं योजनाएं जो 2022 और 21 में लागू किए थे वह भी कागजों पर सिमट कर रह गई है। उन 2021-22 की योजनाओं की समीक्षा करें तो योजनाओं से 70% पत्रकारों को तो फायदा होना था नहीं जो मान्यता प्राप्त पत्रकार थे या जो सरकार के सहयोगी मीडिया कर्मी थे उन्हें ही लाभ के दायरे में रखा गया था देश के जो 70% पत्रकार जो स्वतंत्र पत्रकारिता करता है जो सामाजिक कार्य के माध्यम से समाज को जागृत करता है राष्ट्रभक्ति पैदा करता है देश की अस्मिता को बचाए रखने में अपना योगदान देता है उनका सुध किसी सरकार ने नहीं लिया और आजादी के 75 साल बाद के भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश 2023 के बजट में भी मीडिया कर्मियों समाजसेवियों को जोर का झटका धीरे से लगा।
इस पर आप सभी पत्रकार बंधुओं अपना विचार अवश्य दें और यह जानकारी करके बताएं कि बजट में देश के पत्रकार और समाज सेवा के लिए क्या योजनाएं लागू हुई है उनके लिए कोई निधि बनी क्या।
पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के हितों को लेकर संघर्ष जारी है जारी रहेगा हम अपनी बात सरकार के समक्ष रखेंगे।

एके बिंदुसार
संस्थापक
भारतीय मीडिया फाउंडेशन

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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