20 फरवरी2023 जंतर मंतर छावनी में होगा तब्दील होगा !!
पूरे देश भर के लाखों पूर्व सैनिक होंगे एकत्रित!!
मातृशक्ति वीर नारियों का मिलेगा पूरा साथ!!
चारों तरफ से भारत सरकार को घेर कर वन रैंक वन पेंशन की करेंगे बिंदुवार मिसाइल आक्रमण !!
पूर्व सैनिक एकता एवं अनुशासन का मंदिर बनेगा जंतर मंतर!!
( कैप्टन राज द्विवेदी वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भारतीय मीडिया फाउंडेशन नई दिल्ली की कलम से)

भारतीय सेना का गौरवशाली इतिहास किसी से छिपा नहीं है विश्वयुद्ध से लेकर कारगिल युद्ध तक हमारे वीर जवानों का बलिदान से पटा पड़ा है पूरा हिंदुस्तान की धरती जहां पर शहीदों की अर्थी जाती है वहां वीरों की टोली खड़ी मिलती है हमारे देश के बहादुर जवान बहादुर मातृशक्ति से भरा पूरा परिवार पूरी तरह से सुगंध से भरा पड़ा है कभी हमारे फूल भी पुष्प भी अभिलाषा रखते हैं कि मुझे तोड़ लेना वनमाली उस पथ पर देना तुम फेंक मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जावें वीर अनेक पूरा इतिहास जिसका कोई सानी नहीं है इसीलिए इसी कारण भारतीय सेना विश्व की तीसरे नंबर की सेना है और हमारे बहादुर जवान किसान के बेटे हैं जय जवान जय किसान का नारा देने वाले प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जानते थे कि हमारे जवान 1962 के भारत चीन युद्ध में चीन को दिखा दिया था कि हम भारतीय बलशाली पराक्रमी और जवान हैं जिसको देखकर दुश्मन वापस लौट जाता है इसका उदाहरण 1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान हमारे वीर जवानों ने दुश्मन की छठी का दूध याद दिला दिया था और दुश्मन की कमर तोड़ दिया जिसके चलते पूर्वी पाकिस्तान को हमारी भारतीय सेना के जवानों ने 1971 की लड़ाई में भारत-पाकिस्तान युद्ध में पूर्वी पाकिस्तान को विश्व के मानचित्र से सदा के लिए मिटा दिया और उस पर नाम लिख दिया भारतीय सेना द्वारा बांग्लादेश का पुनर्जन्म जिसका जन्म 16 दिसंबर 1971 को हमारी भारतीय सेना के द्वारा हुआ था दुश्मन की 93000 सैनिक हमारे जवानों के पैरों पर नाक रगड़ रहे थे उसके बाद पूरा विश्व देख रहा था कि हम भारतीय सैनिक हैं हम अपने देश के प्रति इतना प्रेम रखते हैं और दूसरी तरफ भारत सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं आगे आप सबको मालूम होना चाहिए कि जब पाकिस्तान यह समझ गया था कि हम सीधा टक्कर भारतीय जवानों से नहीं ले सकते हैं तो वह 1989 से प्रॉक्सी वार जिसे हम छद्म युद्ध कहते हैं पाकिस्तान ने शुरू किया और आप देखें हमारी भारतीय सेना आज तक उस प्रॉक्सी वार युद्ध में अपने कुशल कौशल मेपारंगत के साथ दुश्मनों को रोज गोलियों से भून रही है और इसी बीच 1999 में कारगिल युद्ध के अंदर दिखा दिया था कि हम भारतीय जवान हैं हम नीचे समुद्र तल से चलकर 7000 फीट ऊंची पहाड़ियों में बैठे हुए दुश्मन को मारने के लिए तैयार है और वही हुआ जो हमारे जवान योजना बना लिए थे दुश्मन कितनी ऊंचाई पर पूरी पोजीशन के साथ हमें नीचे देख रहा है लेकिन हमारे जांबाज सिपाही दुश्मनों को मार मारकर उनका कचूमर निकाल दिया इसका उदाहरण साक्षात जांबाज सिपाही योगेंद्र यादव परमवीर चक्र से सम्मानित किए गए तो दूसरी तरफ नायव सूबेदार बाना सिंह सियाचिन ग्लेशियर के अंदर दुश्मन को मारकर परमवीर चक्र विजेता बने हैं यह है हमारे जवानों का वीरता का प्रतीक राष्ट्रीय तिरंगे झंडे की आन बान शान को कभी झुकने नहीं दिया लेकिन दुर्भाग्य है की हमारे जवानों को सही पेंशन और सही वेतन नहीं दिया गया है इसका पूरा लाभ ऑफिसर कैटिगरी को दिया गया जिन सौतेले व्यवहार को देखकर भारतीय जवान वन रैंक वन पेंशन से संबंधित विषय को लेकर पिछले कई सालों से आंदोलन कर रहे हैं परंतु भारत सरकार उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जिससे सभी प्रदेशों के जवान एवं वीर नारियां तथा उनके परिजन भारत सरकार के इस रवैए से परेशान हो गए और इसी विषय को लेकर जवानों ने अपने अपने संगठन के साथ विचार विमर्श किया और आगामी 20 फरवरी को जंतर मंतर के अंदर निम्नलिखित मांगों को लेकर भारत सरकार के ऊपर चौतरफा हमला करेंगे और इस मिशन की कामयाबी के लिए लाखों सैनिक दिल्ली के जंतर मंतर मैदान में छावनी के रूप में परिवर्तित करेंगे इतना बड़ा सैलाब पहली बार देखने को मिलेगा और जिन मांगों को लेकर पूर्व सैनिक एवं वीर नारियां अपनी मशाल को लेकर भारत सरकार के ऊपर प्रहार करेंगे तब भारत सरकार की कुंभकरण नींद जागेगी क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 2013 की रेवाड़ी रैली में अपने संबोधन में कहा था चाहे वह सिपाही हो लांस नायक नायक हो अथवा हवलदार हो उनको पहले वन रैंक वन पेंशन दी जाएगी लेकिन अभी तक इन पदों में बैठे वह तमाम पेंशनर्स के साथ सौतेला व्यवहार के अलावा कुछ भी नहीं दिया गया है यह केवल कोरी कल्पना है और पूरा का पूरा लाभ ऑफिसर को दे दिया गया जो भारतीय सेना के सभी जवानों ने इसका विरोध किया है कि जब जवानों ने अपना पूरा जवानी देश के हित के लिए दिया तो फिर एक तरफ प्रधानमंत्री जी देने के लिए बोलते हैं तो दूसरी तरफ कुंडली मार कर के बैठे वह तमाम ऑफिसर केवल अपने ऑफिसर भाइयों को फायदा दिलाया है जो सीधा जवानों के ऊपर प्रहार करता है इसी विषय को लेकर इन्हीं बिंदुओं को लेकर भारतीय सैनिक पेंशनर्स जंतर मंतर में एकत्रीकरण करके अपनी पूरी ताकत का इजहार करेंगे और जिन प्रमुख विषयों को लेकर मैदान में उतरेंगे वह सभी जवानों के हित के लिए संजीवनी सिद्ध होगी हम आपको यहां बताना चाहते हैं कि वन रैंक वन पेंशन को ऑफिसर रैंक ऑफिसर पेंशन बना दिया है कोई भी फायदा हमारे जवानों को नहीं मिला है दिसंबर 2014 के दशक में अफसर कैटागरी के लिए लिए 2.81 के साथ मल्टीप्लाई का फार्मूला अपनाया गया और जवानों के लिए सभी नियमों को शिथिल करते हुए 2.57 का फार्मूला लागू कर जवानों के साथ सौतेला व्यवहार किया गया 2006 में अफसर की बेसिक पेंशन 14600 और वन रैंक वन पेंशन के बाद ₹30225 रुपए 2 .81फार्मूला के साथ सातवें वेतन आयोग में जाकर के ₹93363 हो गई जबकि जवानों को 2006 के आधार पर बेसिक पेंशन ₹4066 रखी गई वन रैंक वन पेंशन के बाद ₹7170 दी गई और जवानों को 2.57 फार्मूला के आधार पर सातवां वेतन आयोग में 18427 रुपए प्रतिमाह पेंशन दी गई है और यदि ऑफिसर और जवानों के डिफरेंस को देखा जाए तो जवानों से 74936 रुपया ज्यादा पेमेंट ले रहे हैं इतना बड़ा डिफरेंस जवान और अफसर के बीच में है एक जवान को ₹18427 प्रतिमाह और दूसरी तरफ 93363 प्रतिमाह अफसर को दी गई है इस अंतर को किस प्रकार से पूर्ति भारत सरकार करेगी यह भारत सरकार सोचने में मजबूर है अथवा उस को मजबूर किया जा रहा है यह वक्त बताएगा दूसरी तरफ विधवा पेंशन जिनके पति युवा अवस्था में अपने कर्तव्य की बलिवेदी में अपने प्राणों को भारत मां की सेवा करते समय शहीद हो जाते हैं उनके परिजनों को जो पेंशन मिलती है उसमें बहुत बड़ा अंतर है यदि एक ऑफिसर की विधवा वीर नारी को देखा जाए तो बहुत बड़ा डिफरेंस एक जवान की विधवा वीर नारी के साथ सौतेला व्यवहार किया गया है जबकि दोनों के सामने वही जिम्मेदारी है कि अपने बच्चों को उचित शिक्षा देना और समाज में इज्जत और प्रतिष्ठा के साथ जिंदगी जिया जाए लेकिन वहां देखा जाए तो उनके साथ वही सौतेला व्यवहार लागू किया जा रहा है इसी कड़ी से जुड़ी हुई मांग है डिसेबिलिटी पेंशन जो जवानों और अफसरों को बराबर दी जानी चाहिए अमेरिका और रूस के जवानों और अफसरों को बराबर डिसेबिलिटी पेंशन दी जाती है लेकिन भारत के सिपाहियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है जबकि जवान को भी उतनी ही आर्थिक आवश्यकता है जितनी ऑफिसर के परिवारों के लिए आर्थिक आवश्यकता पड़ती है रक्षा मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा ऑफिसर और जवानों को 100% डिसेबिलिटी पेंशन मिलती है और उसके 3 भाग होते हैं नॉर्मल रेट इंजरी डिसेबिलिटी पेंशन दूसरा बार इंजरी डिसेबिलिटी पेंशन और तीसरा इनवेलिड आउट डिसेबिलिटी पेंशन यहां तीनों प्रकार की डिसेबिलिटी ऑफिसर और जवानों को लागू होती है परंतु ऑफिसर के लिए 2006 में ₹5880 और वन रैंक वन पेंशन 2016 के बाद उनको ₹27000 रुपए 2.81 फार्मूला के हिसाब से दिया गया जो ₹75870 इनक्रीस किया गया इसी प्रकार बार इंजरी में ₹11760 रुपए 2006 में था तो उसको 2016 वन रैंक वन पेंशन के बाद ₹54000 रखा गया और सातवां पे कमिशन में उसको 69990 रुपए कर दिया गया और इसी प्रकार इनवेलिड आउट डिसेबिलिटी पेंशन को 11 760 रूपया 2006 में रखा गया था और फिर 2016 वन रैंक वन पेंशन के बाद ₹90000 किया गया और सातवें वेतन आयोगमें 2.21 फार्मूला के हिसाब से ₹252900 रुपए कर दिया गया इस प्रकार से देखा जाए तो 2006 से 2016 के बीच में 241140 रुपए का अंतर पाया जा रहा है यह ऑफिसर कैटेगरी के लिए भारत सरकार मेहरबान हो गई और पूरा का पूरा लाभ दिया गया अब हम भारत सरकार का ध्यानाकर्षण जवानों को किस प्रकार से निम्न स्तर की डिसेबिलिटी पेंशन दी जा रही है जो अंतर्मन को झकझोर देती है जहां 1 जवान 24 घंटे ड्यूटी करता है अपने माता-पिता भाई-बहन पूरे परिवार को छोड़कर सियाचिन ग्लेशियर जैसे माइनस 45 डिग्री रात दिन मेहनत करता है और वहां अपने अंगों को खो देता है उसी प्रकार से रेगिस्तान की तपती धरती पर मई-जून की गरमी में शरीर को आग में तप कर देश सेवा में अग्रणी भूमिका निभाता है उन जवानों की डिसेबिलिटी पेंशन कितनी कम दी गई है उसका उदाहरण आपके सामने दिया जा रहा है और इसी मांग को लेकर जवान जंतर-मंतर में अपनी मांग को प्रशस्त करेंगे भारत सरकार द्वारा एक जवान को 2006 में नॉरमल रेट इंजरी में ₹3510 बेसिक प्रतिमाह दिया गया और फिर 2.57 फॉर्मूला के अनुसार सातवां वेतन आयोग में ₹9000 कर दिया गया जिसको देखते हुए 2006 से 2016 के बीच में कुल ₹5490 की बढ़ोतरी की गई जबकि ऑफिसर कैटेगरी में ₹75870 किया गया है इसी प्रकार डिसेबिलिटी पेंशन बार इंजरी के लिए ₹7020 जवानों के लिए किया गया लेकिन ऑफिस उसके लिए ₹69990 की बढ़ोतरी की गई तत्पश्चात सेवंथ पे कमिशन में उसको ₹18000 कर दिया गया जबकि अफसरों को ₹1 51 हजार 740 की बढ़ोतरी की गई तत्पश्चात इनवेलिड आउट डिसेबिलिटी पेंशन ₹10304 और 2.57 फार्मूला के अनुसार ₹26481 सातवें वेतन आयोग के बाद जवानों को कर दिया गया जबकि ऑफिसर्स को कुल बढ़ोतरी करके 241140 रूपया कर दिया गया अब आप देखें कि किस प्रकार से ऑफिसर और जवानों के बीच में कितने बड़ा अंतर लाया गया जबकि दोनों परिवारों के लिए उतनी ही आवश्यकता है जितना एक जवान के परिवार को अथवा ऑफिसर के परिवार को झेलनी पड़ती है इस विषय को भारत सरकार ने बिल्कुल नजरअंदाज किया और जवानों एवं अफसरों के परिवार को इतना बड़ा अंतर मान में रखकर जवानों के साथ खिलवाड़ किया गया इस विषय को लेकर सभी भारतीय सेना के सेवानिवृत्त पेंशनर जवानों का आक्रोश फूट पड़ा और अब भारत सरकार के सामने 20 फरवरी को जंतर मंतर मैदान में भारत सरकार के सामने तमाम चुनौतियों को सामने लाएंगे और अपनी मांग प्रशस्त कर भारतीय सेना के अंदर एक नया बदलाव लाएंगे जिससे सभी जवानों एवं उनके परिवारों को पूरा लाभ मिल सके इसी के साथ साथ में अगली कड़ी में हमारे समस्त जवानों की डिमांड है मेडल और अलंकरण से संबंधित न्यायिक मांग जब कोई जवान अच्छा काम करता है तो उसको अलंकरण मेडल देकर सम्मानित किया जाता है चाहे वह सम स्थिति हो चाहे विषम परिस्थिति हो हमारा जवान 24 घंटे सर्विस करता है और जब 26 जनवरी और 15 अगस्त गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस को भारत के महामहिम भारतीय सेना के सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति महोदय द्वारा अलंकरण समारोह में जवानों और अफसरों को मेडल प्रदान किया जाता है इस मेडल और अलंकरण को बड़ी बहादुरी के साथ जवान और अफसर दोनों एक से बढ़कर एक असाधारण कर्तव्य परायणता का परिचय देते हैं जोऔरों के लिए उदाहरण बनते हैं और इस अलंकरण समारोह का गवाह मुख्य अतिथि जो किसी दूसरे देश के मुख्य अतिथि को आमंत्रित किया जाता है इसका गवाह बनता है पूरा देश जो टीवी के माध्यम से परेड को देखता है इसका गवाह होते हैं तीनों चीफ आर्मी स्टाफ इसका गवाह बनते हैं रक्षा मंत्री एवं उनका पूरा स्टाफ जो भारतीय सेना की गरिमा को बनाए रखने में पूरा समय देते हैं और जब किसी अफसर या जवान को मेडल एवं अलंकरण से विभूषित किया जाता है तो उस यूनिट और रेजिमेंट को सबसे बड़ा गर्व होता है लेकिन भारत सरकार रक्षा मंत्रालय द्वारा ऑफिस को 97% और जवानों को 3% के दायरे में रखा गया है इसका एक जीता जागता उदाहरण 2019 के गणतंत्र दिवस समारोह में देखा गया कि अफसरों को अलंकरण समारोह के अंदर 227 मेडल प्रदान किए गए जबकि जवानों को 73 मेडल दिए गए इस विषय को बड़ी गंभीरता के साथ में उठाना होगा और भारत रक्षा मंत्रालय को यहां पर बहुत ही बड़ा कदम उठाना पड़ेगा क्योंकि पूरी पावर अफसरों के हाथ में है जूनियर कमीशंड ऑफीसर को हस्ताक्षर नहीं करने देते हैं जब कभी अफसर ड्यूटी पर अथवा कभी छुट्टी पर जाता है तो उसका चार्ज अफसर ही लेता है किसी जूनियर कमीशन अफसर को चार्ज नहीं देते हैं और ना ही उसको पावर दिया गया है इसलिए अफसर अपनी मनमर्जी से अपना हित साधने का काम करता है यदि यूनिट अथवा रेजिमेंट के सूबेदार मेजर की रिकमेंडेशंस से सभी जवानों और अफसरों के लिए जो वास्तव में कार्य किया है उसकी अनुशंसा सूबेदार मेजर करेगा तभी इसमें न्याय प्रणाली लागू होगी और जवानों को पूरा लाभ मिलना प्रारंभ होगा लेकिन सूबेदार मेजर को भी सिग्नेचर की पावर नहीं है कि वह किसी भी डाक्यूमेंट्स में साइन कर सके जबकि एक सूबेदार मेजर पूरी यूनिट का पिता समान होता है और जवान सूबेदार मेजर की उसी प्रकार से प्रतिष्ठा सम्मान देते हैं जैसे एक पिता को दिया जाता है क्योंकि वह सूबेदार मेजर 28 वर्ष के बाद यह पद ग्रहण करता है और सभी को सौभाग्य नहीं होता कि हर जवान सूबेदार मेजर बने लेकिन भारत वर्ष के अंदर भारतीय सेना के इतिहास को देखते हुए ब्रिटिश टाइम में सूबेदार मेजर के घर तक रोड बनता था उसको जिले के अंदर सबसे बड़ा अधिकारी माना जाता था लेकिन इन अफसरों ने सूबेदार मेजर रैंक को चपरासी बना दिया है जब तक सूबेदार मेजर को पूरी पावर नहीं दी जाएगी तब तक जवानों के साथ न्याय नहीं होगा इसी कड़ी को लेकर जवानों ने यह मांग किया है कि ज्यादा से ज्यादा मैडल न्याय पूर्वक मिलना प्रारंभ हो क्योंकि जवान और अफसरों के बीच में जूनियर कमीशन अफसर एक पुलिया की तरह काम करता है इस पद को भारतीय सेना से नहीं हटाया जा सकता 1990 के दशक में जूनियर कमीशन अफसर पदों को भारतीय सेना से हटाने के लिए योजना बनाई गई थी लेकिन तत्कालीन जनरल ओपी मल्होत्रा साहब ने रक्षा मंत्रालय को आगाह किया था यदि भारतीय सेना की मजबूती चाहते हैं तो जूनियर कमीशन अफसर पदों को रखा जाएगा जिनके बलबूते पर आज हमारी भारतीय सेना चल रही है लेकिन अफसरों की वजह से जो पावर जूनियर कमीशन अफसरों को मिलना चाहिए वह अभी तक नहीं मिली है क्योंकि नायब सूबेदार सूबेदार और सूबेदार मेजर तीन पद जूनियर कमीशन अफसर को भारत सरकार एवं भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है इस पद को कनिष्ठ आयुक्त अफसर के नाम पर जाना जाता है इसको प्रेसिडेंट कमीशन के नाम पर भी लोग जानते हैं लेकिन दुर्भाग्य भारतीय सेना के अफसरों का जिन्होंने इस पद की गरिमा को नहीं पहचाना है और सही दृष्टिकोण में इनको कोई पावर नहीं दी गई है जबकि परमवीर चक्र विजेता जीवित अवस्था में नायब सूबेदार और अब मानद कैप्टन बाना सिंह और सिपाही और अब मानद कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव दोनों जवान जूनियर कमीशंड ऑफीसर से प्रेसिडेंट कमीशन लेकर हम सबके सामने उदाहरण के तौर पर जीवित अवस्था में हैं इसलिए जवानों को पूरा लाभ मिलना आवश्यक है तभी हमारी भारतीय सेना अपनी परंपरा को कायम रखने में पूरी तरह से कामयाब रहेगी और भारतीय सेना के के अंदर अनुशासन एकता बराबर बनी रहेगी क्योंकि हमारी भारतीय सेना के जवान बहुत ही अनुशासन के पक्के होते हैं और सेवानिवृत्ति के बाद में समाज के अन्य कार्यों में बढ़-चढ़कर के हिस्सा लेते हैं जिससे हमारा भारत विश्व गुरु बन सके जिससे हमारा भारत समृद्धि और शक्तिशाली बन सके भारत सरकार को चाहिए जवानों के और उनके परिवारों की सुरक्षा आर्थिक रूप से करें जिससे उनको समाज के अंदर पूरी तरह से उनकी इज्जत का सम्मान बना रहे अफसर और जवानों में किसी भी अलाउंस को लेकर कोई भेद नहीं होना चाहिए सभी को बराबर अलाउंस मिलना चाहिए यही हमारे जवानों की डिमांड है वेतन में जो भारत सरकार ने मुकर्रर किया हुआ है वह बेसिक पे मैं जो अंदर है वह बराबर बना रहेगा लेकिन जो अलाउंस मिलते हैं उसमें सभी को बराबर हिस्सेदारी माननी होगी और सभी को बराबर उनका हक देना होगा इसी के साथ-साथ हमारे पूर्व सैनिक जवानों की मांग है की मिलिट्री सर्विस पे जिसको एमएसपी बोलते हैं मिलिट्री सर्विस पे एमएसपी में 15550 रुपए प्रतिमाह अफसर के लिए दी गई है जबकि जवानों को 5200 रुपया कर दिया गया है इसके लिए सभी को बराबर दिया जाए हमारे जवानों की डिमांड है कि जवानों के बराबर अफसर को एमएसपी दिया उनको 15550 क्यों दिया जा रहा है या तो 15550 सभी को किया जाए और यदि 15550 नहीं किया जाता तो फिर उसको जवान से लेकर अफसर तक ₹5200 सबको एक समान किया जाए जवानों की मांग है कि इतना बड़ा डिफरेंस क्यों रखा गया है किस कारण से अफसर को मिलिट्री सर्विस पे ₹15550 दिया जा रहा है इसको तत्काल बंद किया जाए और एक ही पेमेंट की श्रेणी में जवान और अफसरों को रखा जाए जिससे बराबर हक दोनों को मिल सके इसी से संबंधित हमारे पूर्व सैनिक संगठनों की डिमांड है कि सेवादारी प्रथा को बंद किया जाए सेवादारी प्रथा स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात जबरदस्त सामने आई है भारतीय सेना के अंदर ऑफिसर का सेवादार एक जवान होता है जो सरासर अन्याय है सेवादारी प्रथा में जवानों का मोरल डाउन होता है जबकि एक जवान है लड़ाई के दौरान दुश्मन को मारने के लिए तैयार किया गया है देश की हिफाजत के लिए तैयार किया गया है करोड़ों रुपया ट्रेंडिंग के भारत सरकार दे रही है लेकिन उसका दुरुपयोग सेवादारी तथा बनाकर एक तरफ से अंग्रेजी हुकूमत को याद दिलाती है जो के जवानों को इस रास्ते से गुजरना पड़ता है और जिस रेजिमेंट के अंदर एक जवान किसी भी अफसर की सेवादारी किया होगा वह पूरा जीवन उस अफसर के सामने आंख से आंख नहीं मिला सकता है वह हमेशा डाउन रहेगा इसका सीधा मोरल पर असर पड़ता है इसको रोकने के लिए इस सेवादारी प्रथा को समाप्त करना होगा वास्तव में भारत सरकार को सेवादारी प्रथा लागू करना है तो सीधे सेवादारी के लिए ही भर्ती करें जिससे उस व्यक्ति को अपनी ड्यूटी का आभास हो कि हमें किस ड्यूटी के लिए भर्ती किया जा रहा है लेकिन एक तरफ जवान के लिए भर्ती की जाती है सिपाही बनाया जाता है सोल्जर बनाया जाता है लेकिन उसी सोल्जर को नौकर बनाया जाता है और एक नौकर की तरह उसका परिवार उसका शोषण करता है इस गति प्रथा को समाप्त करना भारतीय सेना को मजबूती प्रदान करने के बराबर होगा भारतीय सेना और राष्ट्रीय झंडे से जुड़ा हुआ है हमारा प्रांतीय प्राण प्रिय तिरंगा झंडा स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस के दिन अथवा किसी भी इमारत में उसका झंडारोहण किया जाता है और जब वो झंडा फहराता है तो हमारे जवानों की सांसों से फहराता और लहराता है इसलिए जवानों का शोषण बंद होना चाहिए तभी हमारे जवान का मोरल ऊपर रहेगा और उसके अंदर सोल्जर की ताकत बरकरार रहेगी उसके जज्बे को उसकी ताकत को दुश्मन पहचान सकेगा इसलिए सैनिक दुश्मन को मारने के लिए अपने देश की सुरक्षा के लिए भारत मां की रक्षा के लिए सजग प्रहरी बनकर राष्ट्र की मुख्यधारा में लोगों को जोड़ने के लिए मुकम्मल काम करता है एक सोल्जर अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए लालायित रहता है लेकिन जब उसको सेवादारी प्रथा में लाकर उसके अरमानों को कुचला जाता है तो उस समय उसके मोराल पर सीधा असर पड़ता है जिससे देश का नुकसान होता है सोल्जर का नहीं होता है और अंत में हमारे सभी पूर्व सैनिक संगठन किया डिमांड है कि सेना के अंदर भ्रष्टाचार पनप नहीं लगा है इस विषय में जो सेना न्यायालय हैं उच्च न्यायालय में अनुशासन से संबंधित हजारों लंबे पड़े हुए हैं इसका खुलासा किया जाए जज एडवोकेट जनरल ब्रांच के पास हजारों मामले भ्रष्टाचार और अनुशासन से संबंधित जवानों और अफसरों के लंबित पड़े हुए हैं जिनकी सुनवाई शीघ्र अतिशीघ्र किया जाए और जो दंड के भागीदार हैं उन को दंडित किया जाए और इसकी रोकथाम के लिए जो भ्रष्टाचार से जुड़ी हुई मामले हैं उस विषय को बड़े गंभीरता से भारत सरकार को उठाना होगा कुछ ऐसे विभाग भारतीय सेना के अंदर हैं जिनका सीधा असर सिविल प्रशासन से जुड़ा हुआ है जितने भी ठेकेदारी प्रथा में भारतीय सेना के कुछ विभाग जुड़े हुए हैं जिनका उठे का मिलता है जैसे राशन पेट्रोल कपड़ा इत्यादि पूरी दुनिया बोफोर्स कांड के बारे में अच्छी तरह से जानती है जब किसी साजो सामान को खरीदा जाता है और उस पर चरम सीमा तक भ्रष्टाचार पनपने लगता है इसी प्रकार राशन से संबंधित जितने भी केस भ्रष्टाचार से जुड़े हुए हैं हमारे ऑफिसर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार से लिप्त कुछ लोग भारतीय सेना को बदनाम करते हैं इसलिए इसकी रोकथाम किया जाए और जितने भी लंबित मुकदमे आर्मी कोर्ट के अंदर चल रहे हैं उनकी शीघ्र शीघ्र निर्णय किया जाए और जो दोषी हैं उनको जेल में बंद किया जाए तभी हमारे भारतीय सेना के अंदर एक अच्छा अनुशासन जागृत होगा और कोई भी व्यक्ति भारतीय सेना के अंदर चल रहे हो शासन के ऊपर उंगली नहीं उठा सकता है क्योंकि हम सब अनुशासित सिपाही हैं और एक सिपाही दूसरे सिपाही की इज्जत करना चाहता है उसकी गरिमा है हमारा भारत महान है भारतीय सैनिक महान है हमारे देश की माताएं महान है जिनकी कोख से भारतीय सेना का सिपाही पैदा होता है और वह अपना सब कुछ न्यौछावर करके भारत की आन बान शान के लिए राष्ट्रीय तिरंगे झंडे के नीचे कसम खाता है कि हम भारतीय सैनिक हैं हवा के रास्ते अथवा जंगल के रास्ते पानी के रास्ते कहीं से भी हमें किसी भी मिशन में ले जाया जाएगा हम खुशी-खुशी जाएंगे अपने गीता कुरान बाइबल और गुरु ग्रंथ साहिब की कसम खा कर के अपना कर्तव्य निभाते हमारे देश के जवान कसम खाते हैं और अपना सर्वोच्च न्योछावर करने के लिए भारत की सीमा पर जाते हैं मां भारती भारत माता पुकारती है ऐसे जवानों को जब तक हमारा जवान हिंदुस्तान का इस प्रकार से सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देता रहेगा तब तक हमारा राष्ट्रीय तिरंगा झंडा उन जवानों की सांसो से लहराता रहेगा हमारे किसान भाई सब खुशी रहेंगे हमारे व्यापारी हमारे देश के अंदर चल रहे वह तमाम उद्योग अच्छी तरह से काम करते रहेंगे देश के अंदर कोई दुखी नहीं रहेगा सब की सुरक्षा के लिए हमारे जवान उनको सुरक्षा देते रहेंगे सुरक्षा प्रदान करते रहेंगे और दुश्मनों की छाती पर राष्ट्रीय तिरंगे झंडे को फहराते रहेंगे यही मुकाम यही अरमान यही सम्मान हमारे समस्त पूर्व सैनिक चाहते हैं कि जो विरासत को हम छोड़ कर के अपने घर में लौट आए हैं और अपने समाज के लिए कार्य कर रहे हैं उन तमाम रेजिमेंट और उन तमाम स्टेशन में रहने वाले उन छावनी में रहने वाले उन तमाम जवानों और अफसरों को सलूट करते हैं कि हम आज बेशक बुजुर्ग हो गए हैं लेकिन जो जिम्मेदारी देकर हम वापस आए हैं उन जिम्मेदारी में आप सभी खरे उतरेंगे और हम सब अनुशासित होकर देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाते रहेंगे यह जो डिमांड है वह केवल पूर्व सैनिकों के लिए नहीं बल्कि सेवारत सैनिकों के परिवारों के लिए भी लागू होती है क्योंकि कोई भी सेवारत सैनिक सीधी डिमांड नहीं करता है वह भारत सरकार पर आश्रित होता है हमारे पूर्व सैनिक संगठन यह मानते हैं की सभी मांगो को अब भारत सरकार अच्छी तरह से देखें उसको समझे और जो वास्तव में सही न्याय उसको दिखाई दे जिससे हमारे सभी पूर्व सैनिकों को लाभ मिले इस विषय को अच्छी तरह से छानबीन करें और भारतीय सेना के अंतर सेवारत सैनिकों तथा सेवानिवृत्त सैनिकों के प्रति पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ आर्थिक स्थिति को देखते हुए अपना फैसला पारित करें जिस विषय को हम लोगों ने जंतर-मंतर पर उठाया है उसको पूरा करें इसी आशा और विश्वास के साथ हमारे समस्त भारतीय पूर्व सैनिक आशान्वित हैं और भारत सरकार के कृतज्ञ रहेंगे कि वह भारतीय सेना के प्रति पूरी तरह से साथ में है किसी भी प्रकार की सौतेला व्यवहार एक दूसरे के साथ ना करें हम सब सैनिक हैं और सब सैनिक बराबर होते हैं एक ही ट्रेनिंग होती है और एक ही मिशन होता है इसलिए सौतेला व्यवहार बिल्कुल न किया जाए और सभी को बराबर हिस्सेदारी में रखा जाए जिससे सभी के परिवार सुरक्षित व्यवस्थित और प्रतिष्ठित रह सके एवं भारत पूरी मजबूती के साथ आगे कदम उठाकर चलता रहे अब वह किस प्रकार से पूर्व सैनिक संगठनों के द्वारा उठाए गए वन रैंक वन पेंशन एवं अन्य बिंदुओं पर किस कदर अपना फैसला सुनाती है पूर्व सैनिक संगठनों ने भारत सरकार की पाली में अपना गेंद डाल दिया है इस विषय को लेकर सभी सैनिक संगठनों ने दोहराया है कि भारत सरकार यदि हमारी मांगों को पूरा करती है तो हम भारत सरकार को बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं और यदि वह हमारी मांगों को पूरा नहीं करती है तो यह लड़ाई अंतिम क्षण तक लागू रहेगी और जब तक भारत सरकार हमारी मांगों को पूरा नहीं करेगी तब तक लड़ाई अनवरत जारी रहेगी लेकिन सभी पूर्व सैनिक संगठनों ने यह आशा किया है कि भारत सरकार हमारी मांगों को पूरा अवश्य करेगी !जय हिंद!! जय भारतीय सेना!