गेहूं के दाम बढ़ने से फ्लोर मिल संचालक परेशान, खुले आटे का भाव चार रुपये बढ़कर 38 रुपये प्रति किलो हुआ
गेहूं 3150 रुपये कुंतल ब्रांडेड आटा `43 किलो

कल बाजार से जो डिमांड आई थी उसी हिसाब से आर्डर ले लिए थे। सोमवार को गेहूं का रेट एकदम से बढ़ गया। आर्डर को रोकना पड़ रहा है। वैसे भी जो गेहूं मिल रहा है उससे प्लांट एक घंटा भी नहीं चल पा रहा है। मंडी में खोजने से गेहूं नहीं मिलता। हर दिन दाम बढ़ने से बाजार से आर्डर लेने में भी डर सा लगता है।
सचिन गुप्ता, प्लोर मिल संचालक
पिछले पांच दिनों से फ्लोर मिल बंद है। लगातार तलाश के बाद मुश्किल से आज 20 कुंतल गेहूं मिला है। वह भी रेट इतने है कि बाजार में भेजने पर सोचना पढ़ रहा है। अब तब जिस रेट में आटा भेज रहे थे उस रेट में अब गेहूं पड़ रहा है। बाजार से लगातार डिमांड बढ़ती जा रही है।
अक्षय कुमार, फ्लोर मिल संचालक
एटा, कार्यालय संवाददाता। पिछले आठ दिनों से लगातार चल रही गेहूं पर महंगाई थम नहीं रही। सोमवार को गेहूं का भाव अब तक की सबसे अधिक ऊंचाई पर पहुंच गया। फुटकर गेहूं तीन हजार रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गया। गेहूं फ्लोर मिल संचालकों को 3150 रुपये कुंतल मिला। गेहूं पर बढ़े दामों के बाद खुले आटे का भाव सोमवार को फिर से चार रुपये बढ़कर 38 रुपये प्रति किलो हो गया। जबकि ब्रांडेड कंपनी का आटा 43 रुपये किलो बिका। इस महंगाई से लोग काफी चिंतित हैं।
किसान गेहूं लगभग पूरी तरह से बेच चुका है। अब तो कुछेक किसानों पर गेहूं बचा है। दिनभर में पूरी मंडी में 20 कुंतल गेहूं आ जाए तो बड़ी बात है। इनता भी गेहूं अगर मंडी आता है तो खरीदने वालों की संख्या काफी बढ़ जाती है। छोटी-छोटी गेहूं की ढेरी पर भी बोली लगना शुरू कर देता है। सोमवार को एटा की गल्ला मंडी में गेहूं 2970 रुपये कुंतल तक बिक गया। गेहूं की महंगाई का असर आम आदमी पर पढ़ रहा है। आटे पर भी दिनोंदिन दाम बढ़ते जा रहे हैं। जिन व्यापारियों ने रविवार को फ्लोर मिल संचालकों को अपने आर्डर दिए थे उन्हें कल के रेट में आटा नहीं मिला। सोमवार को जो रेट आए उसी के हिसाब से बाजार में आटा उतारा गया। मंडी में चढ़े भाव के बाद फ्लोर मिल संचालकों ने उस रेट में दिया जा रहा है।
यूक्रेन की वजह से गेहूं हुआ महंगा गेहूं के कारोबार से जुड़े लोगों की मानें तो इस बार यूक्रेन युद्ध होने से भारत का काफी गेहूं निर्यात कर दिया। देश से बाहर गेहूं जाने के कारण शुरू से ही गेहूं की डिमांड बनी रही। संभावना है कि नई फसल आने पर भी गेहूं के दाम ऊंचे रहेंगे।
एटा से 20 रैक गेहूं जा चुका है साउथ
फसल के समय गेहूं के रेट काफी कम रहे थे। इस बार शुरू से ही बाजार के रेट अधिक रहे थे। ऐसे में सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं कम आया था। एटा में गेहूं की पैदावार ठीक-ठाक होती है। रेलवे के माल अधिकारी कमलेश मीठा ने बताया कि अप्रैल से लेकर अब तक करीब 20 रैक एटा से साउथ इंडिया के लिए जा चुका है। एक रैक में 2600 एमटी गेहूं जाता है।