
तकनीक की बढ़ती पैठ और तेजी से सुधरती पढ़ाई
कुछ सप्ताह ऐसे होते हैं, जब मानो दशक बीतते हुए लगते हैं, यह शायद साल 2022 को समझने-समझाने का सबसे बेहतर तरीका है। जब हमने महामारी के कहर के बाद की दुनिया में सामान्य होना शुरू कर दिया था, जब आर्थिक चुनौतियां बहुत व्यापक रहीं। जब बुरी स्थिति से निकलकर व्यापक स्तर पर सुधार की स्थिति बनती दिखी। एडटेक इकोसिस्टम अर्थात शिक्षा-तकनीक परिवेश ने डिजिटल लर्निंग को जन-जन तक ले जाने की मुख्य क्षमताओं को दोगुना करके इस चुनौती को एक अवसर में बदल दिया है। कोई दोराय नहीं कि हमें 2023 में अधिक स्मार्ट उपकरणों और डाटा की बढ़ती क्षमता और डिजिटल इंडिया के व्यापक फायदे मिलेंगे। अटल लैब्स और पीएम ई-विद्या जैसे महत्वाकांक्षी सरकारी कार्यक्रमों की आमद के कारण डिजिटल शिक्षा भारत में गहरी जड़ें जमा लेगी। 2022 से जो हमने सीखा है, वह बेशक 2023 में काम आएगा।
हाइब्रिड लर्निंग शिक्षा
सभी स्तरों पर बेहतर जुड़ाव और लचीलेपन के साथ पसंदीदा शिक्षण उपकरण के रूप में उभरेगी। के-12, टेस्ट प्रेप, पेशेवर कौशल विकास और बहुत कुछ संभव हो जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और गैमिफिकेशन सीखने के अनुभवों का विस्तार व विकास होगा। सीखने या पढ़ाई के कारगर माध्यम बनाने के लिए एआई की क्षमता को कम करके नहीं देखा जा सकता। अब हम एआई से छात्रों, कक्षाओं और स्थानीय शिक्षा प्रणालियों के लिए अति-व्यक्तिगत समाधान की उम्मीद कर सकते हैं। मतलब, किसी विद्यार्थी को उसकी जरूरत के हिसाब से अलग से पढ़ाना और आसान होगा। तत्काल पढ़ाई या सीखने की सुविधा मिल सकती है। पढ़ाई में स्थान, समय और भूगोल की पारंपरिक बाधाएं नहीं रह जाएंगी।
एक उद्यमशील मानसिकता
महत्वपूर्ण विचार और वैश्विक स्तर पर ठोस समाधान की क्षमता पैदा करती है। भारत दुनिया की शीर्ष उद्यमशील अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। यह 25 करोड़ से अधिक स्कूल जाने वाले बच्चों का देश है और भावी पीढ़ियों में उद्यमी मानसिकता को बढ़ावा देना जरूरी है। 2023 के सबसे महत्वपूर्ण रुझानों में से एक है, प्रौद्योगिकी के सहारे सीखने या पढ़ने से वंचित छात्रों को भी मुख्यधारा में लाना। समावेशी और सुलभ डिजिटल शिक्षा की दिशा में यह प्रयास नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी निहित है। यह सीखने की कमजोर क्षमता वाले बच्चों को भी मुख्यधारा में लाने का समय होगा। साल 2025 तक भारत में अनुमानित 90 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के साथ, शिक्षा से वंचित बच्चों को मुख्यधारा में लाने का अवसर बहुत बड़ा है। शिक्षकों को शिक्षित करना भी जरूरी है। 2020 के बाद से वैश्विक स्तर पर शिक्षकों ने तेजी से बहुत कुछ सीखा है। शिक्षकों के सीखने का यह क्रम जारी रहने वाला है। यह ‘स्टेम’ से ‘स्टीम’ की ओर जाने का समय है। इस दशक में स्टीम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, कला और गणित) कार्यक्रमों पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। आज छात्रों को सहानुभूति, टीम वर्क और परस्पर सहयोग भी सिखाना जरूरी है। इसके साथ जीव विज्ञान, भौतिकी या गणित जैसे विषय भी चलते रहेंगे।
मुख्यधारा की शिक्षा में सामाजिक और भावनात्मक शिक्षा की जरूरत
जब छात्र और संस्थान महामारी के प्रभाव से उबरेंगे, तब सामाजिक व भावनात्मक शिक्षा सबसे आगे आएगी। सहानुभूति और व्यवहार के लिए ऐसे उपकरण या माध्यम की जरूरत पड़ेगी, जो समाज के निर्माण में मददगार हों। तकनीक कक्षाओं में बेहतर सामाजिक कौशल भी पैदा कर सकती है। इससे शिक्षण संस्थानों में स्वस्थ व व्यावहारिक सामाजिक समूह बनाने के प्रयासों का विस्तार होगा।
दुनिया तेजी से डिजिटल हो रही है, शिक्षा व्यापक बदलाव के दौर से गुजर रही है। शिक्षा-तकनीक या एडटेक क्षेत्र के लिए जो विशेष रूप से रोमांचक है, वह है इस बदलाव की गहराई। यह भारत में एक अरब से अधिक आजीवन स्व-शिक्षार्थी बनाने के लिए तैयार है। हम उम्मीद कर सकते हैं कि 2023 ऐसा साल होगा, जब शिक्षा-तकनीक पढ़ाई-लिखाई के दिल में गहराई तक उतर जाएगी और अधिक से अधिक छात्रों की वास्तविक क्षमताओं को उड़ान देने में मदद करेगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)