
प्रधानमंत्री ने ‘अर्बन नक्सलियों’ पर साधा प्रत्यक्ष निशाना, आखिर कौन हैं ये लोग, क्या हैं इनके लक्ष्य ?
गुजरात के भरूच में लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद के शहरी चेहरों पर निशाना साधते हुए कहा की अर्बन नक्सल (शहरी कम्युनिस्ट आतंकी) राज्य में रूप बदलकर घुसपैठ करने का प्रयास कर रहे हैं।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने जंगल में जनजातिय समुदाय (आदिवासी समुदाय) को गुमराह कर हिंसा एवं रक्तपात को बढ़ावा दे रहे नक्सलवादियों को प्रत्यक्ष रूप से अर्बन नक्सलियों से जोड़ते हुए कहा की इससे पूर्व भी राज्य में अर्बन नक्सलियों ने घुसपैठ करने का प्रयास किया था, जिस में विफल रहने के उपरांत वे रूप बदलकर एक बार फिर इसी जुगत में लगे हुए हैं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि जब नक्सलवाद की बात होती है तो महाराष्ट्र उड़ीसा छत्तीसगढ़ झारखंड बिहार आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना का नाम आता है लेकिन इनके साथ अर्बन नक्सलियों का एक बड़ा तंत्र भी है जो भोले वाले जनजातीय समुदाय के युवाओं को बरगला कर उन्हें देश विरोधी कृत्यों में सम्मिलित करने के लिए प्रेरित करता है।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य का जनजातीय समुदाय जिस तरह से स्वयं को विकास की मुख्यधारा के साथ आगे ले जाने का प्रयास कर रहा है उसकी सराहना की जानी चाहिए हालांकि उसे अर्बन नक्सलियों के तंत्र से सचेत होकर रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट आतंकियों का यह तंत्र सरदार सरोवर बांध परियोजना के विरुद्ध षड्यंत्र के तहत किए गए विरोध प्रदर्शनों की धुरी रहा है जो अब दूसरे मार्गों से राज्य की जनता के बीच घुसपैठ का प्रयास कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझने की आवश्यकता है कि वह पहनावा बदलकर उत्साही युवकों को भ्रमित करने का कार्य कर कर रहे हैं जिससे सचेत रहने की आवश्यकता है। अब प्रधानमंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से अर्बन नक्सलियों पर प्रत्यक्ष निशाना साधे जाने को देश के प्रशासनिक तंत्र से लेकर न्यायिक व्यवस्था में घुसपैठ कर चुके अर्बन नक्सलियों एवं उनकी देश विरोधी मानसिकता के विरुद्ध इसे बड़े हमले के रूप में देखा जा रहा है।
बता दें कि प्रधानमंत्री द्वारा अर्बन नक्सलियों पर किए गए इस हमले को सरदार सरोवर डैम परियोजना की धूर विरोधी रही आम आदमी पार्टी की नेता मेधा पाटकर एवं उनके समूह से जोड़ कर देखा जा रहा है जिनपर पूर्व में भी नक्सल समर्थक होने एवं अर्बन नक्सल तंत्र का सक्रिय सदस्य होने के गंभीत आरोप लगते रहे हैं
कौन हैं ‘अर्बन नक्सल्स’ और क्या चाहता है ये तंत्र
दरअसल ‘अर्बन नक्सल्स’ (टर्म) सामान्य तौर पर उन कथित कम्युनिस्ट बुद्धिजीवियों वर्ग के लोगों के समूह के लिए प्रयोग किया जाता है जो देश भर में लोकतंत्र को हटाकर तानाशाही कम्युनिस्ट व्यवस्था स्थापित करने के षड्यंत्र में लगे हुए हैं, इस क्रम में इन अर्बन नक्सलियों द्वारा देश भर में अनेकों गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ), मानवाधिकार समुहों, सामाजिक समुहों, मजदूर संगठनों, किसान संगठनों एवं छात्र संगठनों का गठन किया गया है जिनके माध्यम से देश विरोधी गतिविधियों को संचालित करना इनका मुख्य उद्देश्य है।
इस तंत्र में बाहर से साफ सुथरी छवि वाले वरिष्ठ मानव अधिकार कार्यकर्ताओं, नागरिक समूहों का नेतृत्व करने वाले लोग, छात्र नेता, किसान नेता, मजदूर संगठनों के नेता, बड़े शहरों के विश्वविद्यालयों में पढ़ाने वाले प्रोफेसरों, से लेकर सुदूर जंगलो में कथित रूप से जनकल्याण में लगे कार्यकर्ताओं की अच्छी खासी संख्या है जो मोटे तौर पर समाज में जाति, रंग, भाषा, एवं भगौलिक आधार पर पहले से वयाप्त खाई को गहरा करने एवं समाज को बांटने के लिए नवीन प्रपंच गढ़ते रहते हैं।
इस क्रम में इस तंत्र ने पिछले कुछेक वर्षो में किसान आंदोलन, सीएए (CAA) एनआरसी प्रदर्शन, जेएनयू में भारत विरोधी प्रदर्शन, शाहीन बाग प्रदर्शन, हाथरस में दुष्प्रचारित प्रदर्शन, सरदार सरोवर बांध परियोजना विरोधी प्रदर्शन, भीमा कोरेगांव हिंसा, अवार्ड वापसी प्रपंच, असहिष्णुता प्रपंच एवं हाल ही में अग्निपथ योजना संबंधित विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई एवं इसके संचालन में अग्रणी भूमिका निभाई है।
हालांकि यह केवल इनके देश विरोधी गतिविधियों का एक हिस्सा भर है और वृहद रूप से इनका दायरा भारतीय न्यायिक तंत्र से लेकर बॉलीवुड, खेल जगत और यहां तक कि कई राष्ट्रीय राजनीतिक दलों तक फैला हुआ है जिसके माध्यम से ये संविधान प्रदत्त लोकतांत्रिक अधिकारों की दुहाई देकर भारतीय लोकतांत्रिक व्यव्यस्था को ही उखाड़ फेंकने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।
यह खतरा कितना बड़ा है इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि जहां एक ओर इनकी घुसपैठ प्रशासनिक व्यवस्था से लेकर राजनीतिक दलों तक है तो वहीं जंगलो में आतंक का खेल खेल रहे नक्सली/माओवादी इनकी औपचारिक सैन्य टुकड़ी के रूप में सक्रिय हैं जिनकी सभी गतिविधियों का संचालन इनके निर्देशानुसार ही किया जाता है।
भारत से लोकतांत्रिक व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के इस कुकृत्य में देश भर में सक्रिय कट्टरपंथी इस्लामिक समुहों से अघोषित गठबंधन के साथ ही देश को कमजोर करने वाली बाहरी शक्तियों का भी इनको पुरजोर समर्थन मिलता रहता है जो भारी भरकम वित्तीय पोषण से लेकर इनके द्वारा गढ़े गए प्रपंचों को वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित कर इसके माध्यम से भारत सरकार और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने का प्रयास करते रहते हैं।
अब ऐसे में वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा नक्सलवाद से लेकर इन अर्बन नक्सलियों द्वारा स्थापित किए गए विभिन्न देश विरोधी समुहों, संस्थाओं एवं इनके नेताओं पर हुई जबरदस्त कार्यवाई से बौखलाया अर्बन नक्सलियों का यह तंत्र, येन केन प्रकारेण वर्तमान सरकार को कमजोर करने की कवायद में जुटा है यही कारण है कि इसी तंत्र का भाग रही गुजरात आम आदमी पार्टी की संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार मेधा पाटकर पर अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को दीमक की तरह भीतर से खोखला करने पर आमादा इन अर्बन नक्सलियों के तंत्र से राज्यवासियों को सचेत रहने की आवश्यकता है।