कविता– बांध लिया है जीवन...! बांध लिया है जीवन को, बसने लगे दर्द के डेरे!उगा नहीं सूर्य अभी तक ,जस के तस छाए अंधेरे! चलते -चलते, मन का नाता , मैंने तुमसे जोड़ा है!कदम-कदम...
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बांध लिया है जीवन...!