चुनावी गरमाहट से दवा बाजार ‘ठंडा’, कारोबारियों पर मंदी की मार – रिपोर्ट शुभम शर्मा

चुनावी गरमाहट से दवा बाजार ‘ठंडा’, कारोबारियों पर मंदी की मार – रिपोर्ट शुभम शर्मा
अलीगढ़ – करीब दो साल से दवा बाजार पर बार-बार कोरोना का असर पड़ा है। दवा कारोबारी मंदी से उबर नहीं पाए थे कि विधानसभा चुनाव आ गए। दवा विक्रेताओं के अनुसार अब चुनावी गरमाहट बढ़ने के कारण करीब एक माह से दवा कारोबार फिर ठंडा पड़ गया है। बिक्री 50 फीसद तक कम हुई है। जिससे करीब पांच करोड़ रपये की चपत लगी है। मतदान के बाद कारोबार कुछ संभला तो है, लेकिन अभी पटरी पर दौड़ने में समय लगेगा। फफाला दवा बाजार समेत अलीगढ़ में 250 से अधिक थोक कारोबारी हैं। वहीं, दो हजार से अधिक फुटकर दवा विक्रेता हैं। एक अनुमान के मुताबिक फफाला बाजार में ही रोजाना 30 लाख रुपये का दवा कारोबार होता है। करीब पांच लाख रुपये की थोक में दवा शहर के अन्य हिस्सों से उठ जाती है। 2020 में जनवरी-फरवरी के मध्य करीब 21 करोड़ रुपये की दवा बिकी, लेकिन 2021 लाकडाउन में दवा कारोबार चार-पांच करोड़ पर सिमट गया। दूसरी लहर शांत होने के बाद कारोबार पटरी पर आया। जनवरी में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही सियासी सरगर्मियां बढ़ गईं। इससे दवा बाजार पर खासा असर पड़ा। रिटेलर्स केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री उमेश श्रीवास्तव ने बताया कि जनवरी-फरवरी में मौसमी बीमारियों का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। इस बार लोग बीमार तो चुनाव मूड में होने के कारण भागदौड़ में लगे रहे। अस्पतालों में मरीज न पहुंचने से दवा बिक्री घट गई। अभी भी बिक्री में ज्यादा सुधार होता नहीं दिख रहा। एंटी बायोटिक दवाओं की बिक्री आधी से भी कम रह गई है। अस्थमा, ब्लड प्रेशर, शुगर, चर्म रोग व थायराइड की दवाएं ही बिक रही हैं। कुल 50 फीसद बिक्री घट गई है। इसे संभलने में अभी एक सप्ताह लगेगा।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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