
शहर के क्षेत्रफल का दायरा बढ़ा, सुविधाएं नहीं बढ़ सकी – रिपोर्ट शुभम शर्मा
अलीगढ़ – शहर का दायरा 42 किलोमीटर से बढ़कर 68 किलोमीटर तक फैल चुका है। विकास की तमाम योजनाओं के साथ समार्ट सिटी ने भी यहां कदम जमा लिए हैं। लेकिन, शहरवासियों को मूलभूत सुविधाएं फिर भी नहीं मिल पा रही हैं। आबादी बढ़ने के साथ लाेगों की जरूरतें भी बढ़ चुकी हैं। जगह-जगह कालोनियां बन गईं, अपार्टमेंट खड़े हो गए। मगर, साफ-सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था सुधर न सकी।अब भी अंग्रेजों के शासन से चली आ रही व्यवस्था पर पूरा ड्रेनेज सिस्टम टिका हुआ है। जल संचय के प्रमुख स्रोत छह तालाब अनियाेजित विकास के नीचे दफन हो गए। जो 15 बचे हैं, वे भी आधे-अधूरे और गंदगी से अटे हैं। इनके संरक्षण के सिर्फ दावे हुए, धरातल में कुछ नहीं हुआ। नगर निगम नालों की सफाई और मरम्मत में हर साल दो से तीन करोड़ रुपया खर्च हो जाता है, फिर भी हालात सुधर न सके। 2021 में छह नाले बनाए गए थे, इनमें दो अभी अधूरे पड़े हैं। सरसैयद नगर के निकट नाला एएमयू कैंपस के एक गेट से आगे नहीं बढ़ सका। कुंजलपुर का नाला जीटी रोड नाले से जोड़ा नहीं गया, जिससे वहां जलभराव की स्थिति बनी रहती है। स्मार्ट सिटी के तहत ड्रेनेज व सीवरेज के लिए तैयार हुए मास्टर प्लान के तहत काम हो रहा है। 139 कराेड़ का स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम, 198 करोड़ की अलीगढ़ सीवरेज योजना, फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। लेकिन, इनमें अभी समय लगेगा। नालों की हालत ऐसी है कि वर्षा जल तो दूर घराें से निकले पानी को खुद में समाने की क्षमता भी इनकी नहीं रही। शहर की सीमा में 12.976 किमी पर फैला अलीगढ़ ड्रेन निकासी का प्रमुख स्रोत है। इसी से जाफरी ड्रेन (12.976 किमी) और मथुरा-इगलास रोड ड्रेन (4.724 किमी) जुड़े हैं, जो शहर के 29 संपर्क नालों का पानी अलीगढ़ ड्रेन तक पहुंचाते हैं। अलीगढ़ ड्रेन के जरिए ये पानी काली नदी में गिरता है। तीन प्रमुख नालाें पर बेहिसाब पानी की निकासी का दामोमदार है। इन नालों पर भी अतिक्रमण कर सीवर लाइन इसी में जोड़ दी। ड्रेेनेज सिस्टम बैठने की यह भी वजह है। मानसून में शहर की सड़कें तालाब जैसी लगती हैं। घर, दुकानों तक में पानी भर जाता है। नाले जवाब दे जाते हैं। नगर निगम अफसर शहर की भौगोलिक स्थिति कटोरेनुमा बताकर समस्या से किनारा करते नजर आते हैं।