आखिर कोटेदार क्यों राशन कम देते हैं

कानपुर,  लॉकडाउन में सरकार द्वारा गरीबों को राशन मुहैय्या कराने के दौरान कोटेदारों द्वारा घटतौली कई शिकायतें शासन तक पहुंचती रहीं, इसपर राज्यमंत्री खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति रणवेंद्र प्रताप सिंह के प्रश्न- आखिर कोटेदार क्यों राशन कम देते हैं, पर जिलापूर्ति अधिकारी के जवाब ने सबको दंग कर दिया। बाद में मंत्री ने कोटेदारों को राशन तौलकर ही वितरण के लिए दिए जाने की हिदायत दी।


मंत्री के सवाल पर जिलापूर्ति अधिकारी का जवाब
बुधवार को सर्किट हाउस में आए राज्यमंत्री खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति रणवेंद्र प्रताप सिंह ने आपूर्ति विभाग के अफसरों के साथ बैठक में सबसे पहला सवाल किया आखिर कोटेदार राशन क्यों कम तौलते हैं। इसपर जिलापूर्ति अधिकारी अखिलेश कुमार श्रीवास्तव ने जवाब दिया कि कोटेदारों को गोदाम से दो तरीके से राशन दिया जाता है, पहला तौल के और दूसरा तौल का औसत निकालकर। जो कोटेदार राशन तौलकर लेता है, उसे सबसे खराब खाद्यान्न और वह भी फटे बोरे में दिया जाता है। फटा बोरा मिलने से कोटेदार का बीस रुपये का नुकसान होता है। इसके बाद खाद्यान्न को वाहन में लादने का चार रुपये प्रति क्विंटल का रेट तय है लेकिन इसके लिए छह से आठ रुपए वसूले जाते हैं। इससे कोटेदारों को नुकसान होता है, जिससे वह भी राशन कम तौलते हैं।
उनका जवाब सुनकर मंत्री हीं नहीं बैठक में मौजूद सभी अफसर दंग रह गए।
मंत्री ने जिलापूर्ति अधिकारी को साफ शब्दों में कहा कि अब से कोटेदारों को खाद्यान्न तौलकर ही दिया जाए। मंत्री के निर्देश पर जिलापूर्ति अधिकारी ने कहा कि गोदाम पर पांच टन के कांटे लगे हैं, इसमें आसानी से तौल हो सकती है। इसपर मंत्री के पूछने पर डिप्टी आरएमओ ने बताया कि तीन सौ कोटेदार हैं और दस दिन में सभी को राशन देना होता है। सभी को तौलकर राशन देने का प्रयास करते हैं। कोटेदारों द्वारा कार्ड धारकों को पर्ची नहीं देने का मुद्दा उठा तो बताया गया कि रोल कोटेदारों को खरीदना पड़ता है, इसलिए वह पर्ची नहीं देते।
गेहूं खरीद की धीमी गति पर जताई नाराजगी
खाद्य एवं रसद मंत्री ने गेहूं खरीद की धीमी चाल पर नाराजगी जताई। उन्हाेंने अफसरों को सख्त हिदायत दी कि समय से लक्ष्य की पूर्ति के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं। बैठक में सबसे पहले उन्होंने खरीद का आंकड़ा पूछा तो सिर्फ 31 फीसद खरीद की जानकारी पर उनका पारा चढ़ गया। मंत्री बोले, गेहूं खरीद में तेजी लायी जाए, इसके लिए केंद्र बढ़ाने पड़ें तो बढ़ाए जाएं। अफसरों ने किसानों को समय से पैसा न मिलने की समस्या उठायई तो उन्हाेंने कहा कि किसान को केंद्र तक लाइए, उन्हे जल्द पैसा दिलाए जाने की जिम्मेदारी सरकार की है। एक माह के भीतर 70 फीसद लक्ष्य को हर हाल में पूरा करें।

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