
वाह रे डीलर, पूरा राशन ही हजम कर गया
कालाबाजारी का नायाब तरीका
एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
**गरीबों के राशन कार्ड में शामिल कर दिया बाहरी व्यक्ति
**बाहरी व्यक्ति का अंगूठा लगवा कर डकारी राशन की रकम
एटा। वाह रे डीलर पूरा राशन ही हजम कर गया। गरीबों निर्धनों और असहाओं के लिए कोरोना काल में शासन द्वारा घर-घर राशन पहुंचाने की जो व्यवस्थाएं की गई थी, सभी धरी की धरी रह गई। अधिकांश राशन डीलरों ने गरीबों के इस राशन को जो शासन द्वारा मुफ्त में आवंटित किया जाना था, उसे कालाबाजारी कर लाखों की रकम का हेरफेर कर दिया।
दरअसल, फिलहाल शीतलपुर की ग्राम पंचायत सियपुर का एक गंभीर मामला ऐसा ही जिलाधिकारी और जिला पूर्ति अधिकारी के संज्ञान में आया है। इस मामले की चर्चाएं पूरे जनपद में सनसनी की तरह फैल चुकी हैं। राशन डीलर ने गरीबों के राशन को हजम करने के लिए जो नई व्यवस्था तैयार की थी, उसके तहत संज्ञान में आया है कि प्रत्येक परिवार में यदि 7 लोगों की संख्या है तो उसमें एक बाहरी व्यक्ति को जोड़ दिया गया। जिसके माध्यम से उसका अंगूठा निशानी लगाकर संबंधित परिवार के राशन का गोलमाल हो गया। उसे यह कहकर टहला दिया गया कि उसका राशन कार्ड नहीं बना है। और उस परिवार का गेहूं चावल व चने का वितरण जो शासन द्वारा निशुल्क किया गया था, उसे पूरा हजम कर लिया गया। मामला सीयपुर ग्राम पंचायत का है। यहां 112 राशन कार्ड धारक कोटा डीलर आशीष से जुड़े हैं। आशीष पिछले 3 बरस से कोटे का संचालन कर रहा है। उसे यह कोटा भूपेंद्र कुमार के ग्राम प्रधान बनने के बाद गत 3 वर्ष पहले हासिल हुआ था। क्योंकि आशीष भूपेंद्र के ही परिवार का सदस्य है, इस कारण पूर्व ग्राम प्रधान भूपेंद्र ने आशीष को वह सारी व्यवस्थाओं से अवगत कराया कि किस तरह गांव के अशिक्षित लोगों को बेवकूफ बनाकर राशन की कालाबाजारी की जाती है। बस उसी की तर्ज पर कोटा डीलर आशीष ने गांव के 112 कार्ड धारकों में से तकरीबन 25 ऐसे परिवारों को चुन लिया, जो कुछ भी करने और कहने की स्थिति में नहीं थे। इनमें 20 बरस तक गांव में ही कोटा डीलर रहे धूप सिंह का परिवार भी शामिल था। क्योंकि इन सभी परिवारों के राशन कार्ड कोटा डीलर द्वारा अपने पास ही बंधक कर लिए गए थे, ऐसे में वह कोई भी बहाना बनाकर उन कार्ड धारकों को मिलने वाले राशन के बाबत के यह कहते हुए कि उनका कार्ड नहीं है लिहाजा राशन नहीं मिलेगा। उनके कार्ड पर बाहरी व्यक्ति द्वारा अंगूठा निशानी लगाकर उनका राशन ब्लैक में ही गांव के लोगों को सप्लाई करता रहा।
हाल में हुए पंचायत चुनावों के बाद हालात बदले और भूपेंद्र प्रधान चुनाव हार गया। परिणाम रोशन सिंह प्रधान के पक्ष में आया। गांव के अधिकांश वंचित परिवारों ने राशन न मिलने की शिकायतें वर्तमान प्रधान के समक्ष रखी। ऐसे में समस्या को गंभीरता से लेते हुए ग्राम प्रधान रोशन सिंह ने जिलाधिकारी और जिला पूर्ति अधिकारी को अवगत कराया। हालांकि इस मामले में राशन कार्डों में जिन बाहरी व्यक्तियों का समावेश किया गया है, वह पूर्ति विभाग के सप्लाई इंस्पेक्टर और अन्य अधिकारियों के भी संज्ञान से अछूता नहीं कहा जा सकता। ऐसे में यदि निष्पक्ष और पारदर्शिता पूर्ण प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जांच कराई गई, तो महकमे के कई अधिकारी इस गंभीर मसले में नपने से अछूते नहीं रहेंगे।