हेल्थ अफसरों के दोषपूर्ण कोविड फैसलों से
एटा महिला अस्पताल बन सकता है कोरोना
हॉटस्पॉट..!

हेल्थ अफसरों के दोषपूर्ण कोविड फैसलों से
एटा महिला अस्पताल बन सकता है कोरोना
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*गर्भवती नवजात शिशुओं के स्वास्थ को खतरे में डाल कर चलाये जा रहे कोविड प्रोग्राम

*निर्माणाधीन मेटरनिटी विंग को कोविड अस्पताल बनाने की तैयारी

*महिला अस्पताल में जनवरी से चल रहे वैक्सीनेशन कार्यक्रम से ओपीडी सिजेरियन का ग्राफ गिरा

*कोविड जांच का सेंटर चालू करने का हुआ एलान

एटा। कोविड महामारी से घबराए स्वास्थ विभाग के हेल्थ अफसर इन दिनों जिले की 18 लाख आबादी में ‘गर्भवती एवं शिशु रक्षा ‘ की रेफरल यूनिट महिला अस्पताल को कोविड उपचार/ जांच/ टीकाकरण का हब बना कर जाने अनजाने में जिले की 8 लाख महिलाओं के अस्पताल को खतरे डाल रहा।4 माह से चल रहे कोविड वैक्सीनेशन चलते महिलाओं के इलाज की ओपीडी ठप्प है सिजेरियन नही हो पा रहे कम जगह एवं स्टाफ की कमी के बाबजूद हर रोज होते टीकाकरण में जुटा रहता है। इधर एलान किया गया अब कोविड जांच भी नियमित हुआ करेगी। उधर कई दिनों से डीएम डॉ विभा चहल की पहल पर निर्माणाधीन भवन में कोविड अस्पताल स्थापित करने की कवायद चल रही है। जबकि कहा जा रहा इस अस्पताल को शहर से दूर गत वर्ष की तरह मारहरा या मेडिकल कालेज की नवनिर्मित बिल्डिंग में बनाया जा सकता है। यानि अफसर महिलाओं एवं नवजातों की स्वास्थ्य रक्षा की सरासर अनदेखी कर दोषपूर्ण नीतियां बना रहे हैं। यानी अब महिला अस्पताल की सीमित जगह में गर्भवती के साथ कोविड संक्रमितों की जांच वैक्सिनेशन के साथ कोविड मरीजो का इलाज भी हुआ करेगा। साफ जाहिर ‘ आग और फूस ‘
साथ होंगे ऐसे में गर्भवती की सुरक्षा राम भरोसे…?
गौरतलब है महिला अस्पताल जिले का एकमात्र FRU है , यहाँ पूरे जनपद से संदर्भित की गई गर्भवती महिलाओं का जटिल प्रसव ,सिजेरियन ऑपरेशन ,स्त्री रोग , प्रसूता , फैमिली प्लानिंग जैसे अतिमहत्वपूर्ण कार्य भी है ।
स्मरण रहे उत्तर प्रदेश शासन ने गत वर्ष ऐसे मेटरनिटी अस्पतालों को गर्भवतियों के हित में ऐसे अस्पतालों को कोविड प्रोग्रामो से अलग रखने के निर्देश दिए थे।पर सरकार की ऐसी गाइड लाइन या व्यवहारिक पहलुओं को देखने की फुर्सत किसे है। आने बाले समय मे जटिलताएं आएंगी तब देख लिया जाएगा..शायद जिमेदार अफसर यह मान बैठे है ।
इधर कोविड के इन केंद्रों को चलाने के लिये जगह की कमी हो ऐसी बात भी नही नगर क्षेत्र में नगरीय स्वास्थ केंद्र नगला पोता एवं मंडी समिति पर हैं।उधर बड़ी विशाल बिल्डिंग मारहरा रोड पर मेडिकल कालेज की भी है।परन्तु स्थानीय नीति निर्माता हेल्थ अफसर न तो डीएम महोदया को सुझाव दे रहे हैं और न महिला अस्पताल में भविष्य में पैदा होने बाली जटिलताओं से अवगत करा रहे हैं। इधर महिला अस्पताल के अनेक डॉक्टरों सहित स्वास्थ कर्मी इन प्रोग्रामो के चलते तेजी से धड़ाधड़ संक्रमित होने लगे।
अधूरी मेटरनिटी विंग एव निर्माणाधीन मेडिकल कालेज के कारण इस अस्पताल में पहले से ही जगह कम है उस पर पूरे जिले की सामान्य/जटिल प्रसव के केस सम्पन होते हैं दूसर्टी तरफ नवजात शिशु सहित बच्चों का टीकाकरण किया जाता है महिला अस्पताल होने के कारण महिला मरीजो की भरमार रहती है। इन स्थानीय हालात को अनदेखा कर कोविड से जुड़े अफसरों ने दो सत्र स्थल कोविड वैक्सिनेशन के लिये बनाये हैं।जिसके कारण माना जा रहा है यहां चलने बाली नियमित ओपीडी प्रभावित हुई है।
एक जानकारी से पता चला है कि महिला अस्पताल में कोविड टीकाकरण शुरू होने से पिछले 2 माह में मात्र 11 सिजेरियन हो पाए हैं , क्योंकि पहले से ही कम स्टॉफ की ड्यूटी कोविड टीकाकरण में लगा दी गई , और ओपीडी भी प्रभावित हुई , जिससे सिजेरियन के लिए कॉउंसलिंग & मोटिवेशन खत्म हो गया । वहीं कम जगह के कारण रूटीन टीकाकरण,प्रसूताओं की जांच आदि प्रभावित हुई है।जिले की एक मात्र महिला मरीजो की रेफरल यूनिट के हश्र पर व्यापार मंडल के अध्यक्ष अतुल राठी ने दो टूक कहा है कोविड हॉस्पिटल तो शहर से दूर किसी भवन में बनाया जाना चाहिये शहर के बीचों बीच बनाया जाना किसी सूरत में उचित नही है। उन्होंने कहा कोविड जांच सेंटर अलग थलग होने चाहिये जब दो नगरीय केंद्र हैं तो उनका उपयोग किया जाए जिले की गर्भवती महिलाओं और नवजातों की सुरक्षा खतरे में नही डाली जानी चाहिये उन्होंने कहा है महिला अस्पताल के व्यवहारिक पहलुओं से अफसरों को अवगत कराया जाएगा।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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