आज हम वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जन्म जयंती पर उनके चरित्र को संक्षिप्त रूप में जानें-
हमें गौरव है आप हमारे पूर्वज थे
आप के बाद आप सा क्षत्रिय इस भूमि ने फिर नहीं जना।
महाराणा प्रताप की मृत्यु के बाद अकबर की मनोदशा पर अकबर के दरबारी दुरसा आढ़ा ने राजस्थानी में जो छंद लिखा उसका हिंदी अनुवाद पढ़े बिना आप
महाराणा प्रताप के प्रचंड पराक्रम,अद्वितीय युद्ध कौशल
अभूतपूर्व त्याग को आप नहीं जान सकते।
अक्षरशः हिंदी अनुवाद पढें-
राणा प्रताप तेरी मृत्यु पर शाह यानि सम्राट ने दांतों के बीच जीभ दबाई और निश्वास के साथ आंसू टपकाए। क्योंकि तूने कभी भी अपने घोड़ों पर मुगलिया दाग नहीं लगने दिया।
तूने अपनी पगड़ी को किसी के आगे झुकाया नहीं, हालांकि तू अपना आडा यानि यश या राज्य तो गंवा गया लेकिन फिर भी तू अपने राज्य के धुरे को बांए कंधे से ही चलाता रहा।
तेरी रानियां कभी नवरोजों में नहीं गईं और ना ही तू खुद आसतों यानि बादशाही डेरों में गया
। तू कभी शाही झरोखे के नीचे नहीं खड़ा रहा और तेरा रौब दुनिया पर निरंतर बना रहा। इसलिए मैं कहता हूं कि तू सब तरह से जीत गया और बादशाह हार गया।
अपनी मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए अपना पूरा जीवन बलिदान कर देने वाले ऐसे वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप और उनके स्वामिभक्त घोड़े चेतक
भील सरदार राणा पूंजा और मंत्री भामाशाह के दान
को इस धरती के अस्तित्व तक याद किया जाएगा।
हम
अपने क्षत्रित्व से कमजोर का रक्षण करेंगे और शत्रु कितना ही ताकतवर उसके आगे समर्पण नहीं करेंगें।