
जिला सूचना अधिकारी के व्यवहार से जिले के पत्रकार नाखुश
चापलूसों के चंगुल में फंसा जिला सूचना अधिकारी
एटा। जिला सूचना अधिकारी मिथलेश कुमार के व्यवहार से जिले के पत्रकार बेहद नाखुश हैं अक्सर देखने में आया है कुछ चापलूस पत्रकारों को कार्यालय में बैठाकर अपना महिमा मंडन कराकर खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं लेकिन जिले के पत्रकार उनके इस व्यवहार से बेहद नाखुश हैं क्योंकि जिला सूचना अधिकारी मिथलेश कुमार अन्य पत्रकारों के कार्यालय में पहुंचने पर ना ही उनको सम्मान देते हैं और नाही उनके साथ व्यवहारिक रूप से वार्तालाप करते हैं। सूचना विभाग अक्सर ऐसे लोगों को बढ़ावा दे रहा हैं जो पैसे के दम पर मान्यता कराकर उनके जेबें भर रहें हैं। जबकि शासन से पत्रकारों के चाय-नाश्ते आदि के लिए बजट आता है लेकिन यहां उल्टी गंगा बह रही है यहां तो उल्टा पत्रकारों से चाय-नाश्ता मांगा जाता है। इसके साथ ही बता दें जिस लहजे में जिला सूचना अधिकारी पत्रकारों से बात करते हैं उससे तो लगता है उन्हें प्रेस सम्बंधी विभागीय जानकारी नहीं है ज्यादातर पत्रकारों की शिकायत है कि जब वे अपना अधिकार पत्र जमा करने कार्यालय जाते हैं तो वहां उनको ना ही बैठने को कहा जाता है और ना ही उनके नामों को सूची में शामिल किया जाता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अल्प समय में जुड़े अनभिज्ञ पत्रकारों को 15 से 20 हजार रुपए लेकर मान्यता दिलाकर अपनी जेबें भरी हैं। और एटा में ऐसा प्रथम बार हुआ है कि नवागत जिला अधिकारी ने प्रेस से भेंट वार्ता नही की इसका भी पूरा दायत्व जिला सूचना अधिकारी को जाता क्यो कि जब भी कोई जिला अधिकारी जिले का चार्ज लेते थे तभी सूचना अधिकारी जिला अधिकारी से आग्रह कर प्रेस भेट वार्ता के लिए कहते थे अबकी वार तो जिला सूचना अधिकारी को अपनी चापलूसी से ही फुर्सत नही मिली जिससे जिला अधिकारी प्रेस भेट वार्ता के वारे में जानकारी दी जाए यही कारण रहा कि जिला अधिकारी की प्रेस से भेट वार्ता नही हो सकी । जिलाधिकारी को इस मामले की गहन जांच कराकर आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए जिससे जनपद में मीडिया की छवि साफ बनी रहे और फूट डालो राजनीति कराने वाले अधिकारी एवं उनके सहयोगियों को सबक मिल सके।
साभार,दिनेशचंद्र शर्मा पत्रकार
दैनिक शहीदी दरिया