प्राइवेट पब्लिक स्कूल प्रबंधकों की मनमानी पर लगाम लगे–डा. रक्षपालसिंह चौहान

प्राइवेट पब्लिक स्कूल प्रबंधकों की मनमानी पर लगाम लगे–डा. रक्षपालसिंह चौहान
गाजियाबाद। 27 अक्टूबर। आजकल देश में कोरोना वायरस के चलते सीबीएसई एवं आईसीएसई से संबद्ध अधिकांश प्राइवेट पब्लिक स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षा की रस्म अदायगी हो रही है और इसी बीच स्कूलों के प्रबंध तंत्र अभिभावकों पर उनके बच्चों की फीस जमा कराने हेतु दबाव डाल रहे हैं । यह कहना है प्रख्यात शिक्षाविद एवं डा. बी आर अम्बेडकर विश्व विद्यालय, आगरा शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष डा. रक्षपालसिंह चौहान का। उन्होंने कहा है कि यह कैसी विडंबना है कि एक ओर सरकार सर्व शिक्षा अभियान चला रही है ,वहीं दूसरी ओर फीस जमा न करने की स्थिति में स्कूलों से बच्चों के नाम काटने की धमकियां अभिभावकों को दी जा रही हैं । मुख्य समस्या यह है कि देश में विगत मार्च 2020 से कोरोना महामारी के कारण प्राइवेट नौकरी पेशा वाले अधिकांश अभिभावकों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है और उनके लिये अपने बच्चों की फीस भरना तो दूर रहा , वे तो जैसे तैसे अपना एवं अपने परिवारीजन का पेट भरपा रहे हैं । ऐसी विषम परिस्थितियों में अभिभावकों पर स्कूल की फीस जमा करने का दबाव बनाना और न देने की स्थिति में बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा से वंचित कर देना किसी भी दृष्टिकोण से न्याय संगत नहीं कहा जा सकता। इसलिये केन्द्र व राज्य सरकारों को प्राइवेट पब्लिक स्कूल प्रबंधकों की मनमानी पर लगाम लगानी ही चाहिए।
दरअसल कोरोना वायरस के पैर पसारने से अब तक देश के स्कूल बंद है तथा वहां खेल, सांस्कृतिक एवं अन्य विभिन्न गतिविधियों के संचालित होने का तो प्रश्न ही नहीं उठता है ,लेकिन अफसोस है कि स्कूलों के प्रबंध तंत्र ट्यूशन फीस के साथ ही उक्त सारी गतिविधियों की मदों में उल्लिखित शुल्क की वसूली कर रहे हैं। देश के अन्य स्कूलों के साथ ही साथ ऐसा ही एक ताजा मामला वैशाली स्थित नेशनल विक्टर पब्लिक स्कूल गाजियाबाद का संज्ञान में आया है। सभी अवगत हैं कि देश की विषम परिस्थितियों में हजारों अभिभावक अपनी नौकरियों से हाथ धो बैठें है और विकट आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन अफसोस है कि अभिभावकों की जटिल समस्याओं की ओर से सरकारें आंखें मूंदे बैठी हैं और सबसे अधिक दुख इस बात का है कि इन साधनहीन अभिभावकों की समस्याओं के प्रति न तो जनप्रतिनिधि और ना सरकार ही संवेदनशीलता एवं मानवीय दृष्टिकोण का परिचय दे रही है।

यहां यह उल्लेखनीय है कि गुजरात ,राजस्थान एवं अन्य कुछेक अन्य प्रदेशों की सरकारों ने स्कूल बंद रहने की स्थिति में बच्चों से फीस न लिए जाने का महत्वपूर्ण , सराहनीय एवं अनुकरणीय निर्णय लिया है । देश के वर्तमान असामान्य हालातों के मद्देनजर पब्लिक स्कूलों के प्रबंध तंत्रों को भी गुजरात,राजस्थान सरकारों की भांति कोरोना काल में स्कूलों के बन्द रहने के चलते अन्य प्रदेशों की सरकारों को भी बच्चों से फीस न लिये जाने का निर्णय लेकर गरीब एवं साधनहीन अभिभावकों के प्रति संवेदनशीलता व सहानुभूति का रुख अपनाया जाना चाहिये । ऐसा करने से विद्यार्थियों के अभिभावकों को राहत मिल सकेगी और बच्चों का भविष्य भी बरबाद होने से बच सकेगा।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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