स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती–श्रीप्रकाश सिंह निमराजे

स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती–श्रीप्रकाश सिंह निमराजे

ग्वालियर। गोपाल किरन समाजसेवी संस्था के संस्थापक अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह निमराजे का कहना है कि सतत् विकास का लक्ष्‍य ,उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली, यह जीवन की आज सबसे बड़ी चुनौती है। उत्तम स्वास्थ्य की सुनिश्चितता और हर उम्र में सब की खुशहाली को प्रोत्साहन देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसका मुकाबला आसान नहीं है। क्योंकि खराब स्‍वास्‍थ्‍य से दिनों दिन बढ़ता कष्‍ट ,वह चाहे आर्थिक हो या शारीरिक और सबसे बुनियादी समस्या वह वंचनाएं हैं जिनके चलते देश में शिशु मृत्यु का अनुपात बढ़ता ही चला जा रहा है। यह चिंतनीय है और हालात की भयावहता का संकेत भी है।

दरअसल विश्व के अनेक क्षेत्रों में आज ये बीमारियां और नई – नई महामारियां सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। दुखदायी बात यह है कि आजादी के सात दशक बाद भी सभी को किफायती स्वास्थ्य सेवा सुलभ होना एक सपना बना हुआ है। यह एक चुनौती है जिसके बारे में देश की सत्ता पर काबिज सरकारों का सोच ही नहीं है। यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। सरकारें यह कदापि नहीं सोचतीं कि बीमारी केवल एक व्‍यक्ति की खुशहाली पर ही असर नहीं डालती बल्कि वह उसके पूरे परिवार और जन संसाधनों पर भी बोझ बनती है। समाज को कमज़ोर औऱ मानवीय क्षमता का ह्रास करती है। जबकि हर उम्र के लोगों का उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली सतत् विकास का प्रमुख केंद्र बिंदु है। बीमारी से बचाव न सिर्फ जीने के लिए ही बेहद ज़रूरी है अपितु यह सभी को आर्थिक वृद्धि और सम्‍पन्‍नता का अवसर भी प्रदान करता है।

निमराजे का कहना है कि संस्था ने सतत् विकास के तीसरे लक्ष्‍य के माध्यम से बीमारी को खत्‍म करने, उपचार व्‍यवस्‍था और स्‍वास्‍थ्‍य सेवा को मज़बूत करने, तथा स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी नए और उभरते मुद्दों के समाधान के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्‍प लिया है। इसके लिए इन क्षेत्रों में नई सोच और अनुसंधान की आवश्‍यकता के तहत जन- नीतिगत प्रयासों को आगे बढ़ाया जाना समय की मांग है। यह तभी संभव है जबकि बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति समग्र दृष्टिकोण
सुनिश्चित किया जाये,सभी को स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं सुलभ हों और दवाएं तथा टीके उनके साधनों के भीतर उपलब्ध हो सकें। इसमें मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़े मुद्दों पर नए तरीके से विचार किए जाने की बेहद ज़रूरत है, इसके बिना सारे प्रयास बेमानी होंगे।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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