
बरेली,फतेहगंज पश्चिमी ।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से आजकल अखबार में प्रकाशित खबर जैसी दिखने वाली फर्जी तस्वीरें तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के मामले में फतेहगंज पश्चिमी के छात्र असद अंसारी ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में शिकायत दर्ज कराई है।
असद ने तमाम एआई मॉडल के माध्यम से अखबार की खबर जैसी दिखने वाली फर्जी इमेज तैयार करने पर रोक लगाने के लिए प्रभावी नियम बनाने की मांग की है। वर्तमान समय में उपलब्ध विभिन्न एआई टूल्स की मदद से ऐसी तस्वीरें तैयार करना संभव हो गया है, जिनमें किसी भी प्रतिष्ठित अखबार का नाम, लोगो, हेडलाइन, खबर, फोटो और पृष्ठ-सज्जा तक वास्तविक समाचार-पत्र जैसी दिखाई देती है।
इस तरह की मनगढ़ंत खबरों को असली अखबार में प्रकाशित समाचार के रूप में पेश करके सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर धड़ल्ले से प्रसारित किया जा सकता है। इससे न केवल आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है, बल्कि किसी व्यक्ति, सरकारी अधिकारी, जनप्रतिनिधि या संस्था की सामाजिक छवि को भी गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इसके साथ ही वास्तविक समाचार-पत्रों और पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर भी इसका गहरा विपरीत असर पड़ता है।
शिकायत पत्र में मांग की गई है कि एआई मॉडल विकसित करने वाली तकनीकी कंपनियों के लिए अनिवार्य सुरक्षा मानक निर्धारित किए जाएं। इसके अलावा ऐसी तकनीकी व्यवस्था लागू की जाए, जिससे एआई के माध्यम से वास्तविक अखबार जैसी दिखने वाली फर्जी खबरों की इमेज तैयार करने पर निर्माण के स्तर पर ही प्रभावी रोक लगाई जा सके। असद का कहना है कि केवल सोशल मीडिया पर फर्जी सामग्री प्रसारित होने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी सामग्री के निर्माण के स्तर पर ही रोक लगाने के ठोस उपाय किए जाने चाहिए।
पीएमओ में शिकायत के बाद आईटी मंत्रालय कर रहा जांच
पीएमओ में शिकायत दर्ज होने के बाद यह मामला इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज एंड आईओटी डिवीजन को भेजा गया है। संबंधित अधिकारी के रूप में संयुक्त सचिव एवं जीसी श्री सुदीप श्रीवास्तव इस पूरे प्रकरण की जांच कर रहे हैं। छात्र असद अंसारी ने केंद्र सरकार से इस गंभीर विषय पर एक समग्र और प्रभावी नीति बनाने का आग्रह किया है। उनका स्पष्ट कहना है कि इस नई तकनीक के दुरुपयोग को रोकना बेहद जरूरी है, ताकि फर्जी अखबारी खबरों के जरिए लोगों को गुमराह करने और समाज में भ्रामक सूचनाएं फैलाने वालों पर समय रहते कड़ा अंकुश लगाया जा सके।