
बरेली,शाहजहांपुर । चौक कोतवाली क्षेत्र से सामने आया यशी उर्फ नाव्या की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। 24 सितंबर को फंदे से लटककर जान देने वाली इस बेटी के पिता ने अब सीधे तौर पर स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हुसैनपुरा के रहने वाले शशिकांत शर्मा का आरोप है कि उनकी बेटी को उसके ही सगे ताऊ लक्ष्मीकांत शर्मा और ताई राजेश्वरी देवी ने मोबाइल चोरी का झूठा इल्जाम लगाकर इस कदर मानसिक रूप से तोड़ा कि उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। पुलिस ने मामला तो दर्ज किया, लेकिन इंसाफ के नाम पर अब तक केवल तारीखें और ढिलाई नजर आ रही है।
पिता का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बेटी ने अपने आखिरी खत यानी सुसाइड नोट में ताई राजेश्वरी देवी का नाम साफ-साफ लिखा है, तो फिर अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? दोनों आरोपी खुलेआम फरार कैसे घूम रहे हैं? इतना ही नहीं, पिता ने यह सनसनीखेज आरोप भी लगाया है कि पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लेने के बाद कथित तौर पर छोड़ दिया।
पिता का कहना है कि पुलिस ने घटना की गंभीरता और सुसाइड नोट के आधार पर सख्त धाराएं नहीं लगाई हैं। कमजोर धाराओं के जरिए आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
पिता का रुख:
शशिकांत शर्मा ने साफ कर दिया है कि वह चुप नहीं बैठेंगे। एसपी सिटी, एसपी और एडीजी स्तर के अधिकारियों के सामने पुलिस की लापरवाही का कच्चा-चिट्ठा रखेंगे। उनका दो-टूक कहना है—“अगर पुलिस अधिकारियों से न्याय नहीं मिला, तो मैं सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चौखट पर जाकर इंसाफ की गुहार लगाऊंगा।”
दूसरी तरफ, पुलिस का वही रटा-रटाया बयान सामने आया है कि दर्ज रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष विवेचना की जा रही है और तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई होगी। लेकिन सवाल वही है—जब सुसाइड नोट खुद सबसे बड़ा सबूत है, तो कार्रवाई में यह ढिलाई क्यों?
क्या एक लाचार पिता को अफसरों की चौखट से इंसाफ मिलेगा या फिर मुख्यमंत्री दरबार ही आखिरी सहारा बनेगा?