
बरेली । अन्नदाता के पसीने की एक-एक बूंद का हिसाब अब प्रशासन चुकता करने जा रहा है। नवाबगंज क्षेत्र के औरंगाबाद स्थित ओसवाल चीनी मिल पर प्रशासन का कड़ा चाबुक चल चुका है। मिल प्रबंधन ने गन्ना किसानों के करीब 74 करोड़ रुपये दबा रखे थे, लेकिन अब खेल खत्म हो चुका है। प्रशासन ने मिल परिसर में नीलामी की लाल झंडी गाड़ दी है और पूरे परिसर पर ताला जड़ दिया गया है।
एसडीएम सचिन यादव ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि किसानों के हक का पैसा हर हाल में दिलाया जाएगा।
मिल का कुल मूल्यांकन 180 करोड़ रुपये तय किया गया है।
नीलामी के लिए बाकायदा दो सप्ताह पहले पुणे (महाराष्ट्र) से आई तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने मिल की संपत्ति का बारीकी से आकलन किया था।
आने वाली 22 अक्तूबर को इस 180 करोड़ की मिल की सार्वजनिक नीलामी की जाएगी।
नीलामी की तारीख तक मिल पूरी तरह सील रहेगी। प्रशासन के सख्त निर्देश हैं—बिना मजिस्ट्रेट की इजाजत के मिल के भीतर परिंदा भी पर नहीं मार सकता।
प्रशासन के इस सख्त कदम से किसानों में उम्मीद की किरण जागी है कि महीनों से फंसा उनका 74 करोड़ रुपये का बकाया अब बहुत जल्द उनके बैंक खातों में पहुंचेगा। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मिल नीलाम होगी, पैसा वसूला जाएगा और पाई-पाई किसानों को लौटाई जाएगी।