भीषण गर्मी और बिजली कटौती
सरकारी अस्पतालों में इलाज का अभाव, प्राइवेट में रोगियों की मची रेलमपेल

एटा । दिन पर दिन बढ़ती मलेरिया टाइफायड जैसे मरीजों की संख्या पर जनपद के जिम्मेदार विभाग भले गम्भीर न हों । लेकिन इसकी बजह भीषण गर्मी के प्रकोप के दौरान घण्टों गायब रहने बाली बिजली ही लगती है । क्योंकि एक तरफ कुदरत की मार तो दूसरी तरफ बिजली कटौती । अब तंग गलियों और बंद मकानों में रहने बाले बचें तो कैसे ? शायद यही बीमारी के लक्षण है । तभी तो हालात कुछ ऐसे बन रहे है कि मरीजों की संख्या में तेजी के साथ इजाफा हो चला है । ऐसा प्रतीत होता है जैसे स्थिति जानबूझकर विकराल बनाई जा रही हो । क्योंकि कोरोना को ढाल बनाकर जहां सरकारी अस्पताल में मरीजों को उपचार से अछूता रखा जा रहा है वहीं प्राइवेट डाक्टरों की दुकानों और निजी अस्पतालों में रोगियों की रेलमपेल मची हुई है । सहाब समय से हालातों पर कंट्रोल नही किया गया तो स्थितियाँ सम्हालना मुश्किल हो जायेगा ।